पंजाब से बिना वैध वीजा यूनाइटेड किंगडम (यूके) भेजने के मामले की जांच अब एसआईटी करेगी। यह पता लगाया जाएगा कि कौन इस संगठित नेटवर्क का संचालन किस स्तर पर और कौन-कौन लोग कर रहे हैं।
विशेष जांच टीम (एसआईटी) में एआईजी क्राइम जोन अमृतसर ऋचा अग्निहोत्री, स्टेट क्राइम मोहाली की इंस्पेक्टर गीता और अमृतसर स्टेट क्राइम के इंस्पेक्टर जोरावर सिंह शामिल हैं।
इस मामले में शामिल ट्रैवल एजेंसियों की पहचान पहले ही हो चुकी है, जिसके बाद अब पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला एक संगठित और सुनियोजित रैकेट का हिस्सा है, जिसकी जड़ें पंजाब से बाहर देश के कई हिस्सों तक फैली हो सकती हैं।
स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन मोहाली के अधिकारियों ने बताया कि जिन एजेंसियों के माध्यम से 14 लोगों को यूके भेजा, उनके नाम भले ही अलग-अलग हों और उनके दफ्तर विभिन्न शहरों में संचालित हो रहे हों, लेकिन वे सभी आपस में इंटरलिंक्ड हैं और एक ही नेटवर्क के तहत काम कर रही थीं। यही कारण है कि इस पूरे मामले को एक बड़े संगठित रैकेट के रूप में देखा जा रहा है।
इन एजेंसियों को पहले से ही पूरी प्रक्रिया की जानकारी होती थी और उसी के आधार पर यात्रियों को तैयार किया जाता था। विदेश पहुंचते ही संबंधित लोग सीधे एयरपोर्ट पर शरण (असाइलम) के लिए आवेदन कर देते थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि पूरा ऑपरेशन पूर्व नियोजित था।
इसमें यात्रियों को पहले से ही इस प्रक्रिया के लिए मार्गदर्शन दिया जाता था। अब एसआईटी इस बात की गहन जांच करेगी कि इन एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल कैसे काम कर रहा था, नेटवर्क का मुख्य संचालन कहां से हो रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
यह भी देखा जाएगा कि विदेश भेजने की प्रक्रिया में किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और क्या इसमें किसी प्रकार का फर्जीवाड़ा या नियमों की अनदेखी की गई। जांच का दायरा वित्तीय लेन-देन तक भी बढ़ाया है। टीम यह पता लगाएगी कि इस पूरे रैकेट में कितनी रकम का लेन-देन हुआ और किन माध्यमों से पैसे का ट्रांजेक्शन किया गया।
साथ ही एयरपोर्ट स्तर पर संभावित चूक या किसी प्रकार की मिलीभगत को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। डीएसपी राजिंदर सिंह का कहना है कि एसआईटी की जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


