सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक याचिका में लापता व बचाए गए बच्चों की पहचान बहाल करने में मदद के लिए एक राष्ट्रीय डीएनए व बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली स्थापित की मांग को बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया। याचिका में इसके लिए केंद्र और अन्य पक्षों को निर्देश देने की मांग की गई है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से इस मुद्दे से निपटने के लिए समाधान सुझाने को कहा।
चीफ जस्टिस ने क्या कहा?
प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा, यह मुद्दा निश्चित रूप से बहुत-बहुत संवेदनशील है.. आप अपने जूनियर्स से थोड़ा होमवर्क करने को कहें और हमें एक रूपरेखा दें कि इसका समाधान क्या होना चाहिए। सोचें कैसे एक सहयोगात्मक तंत्र बनाया जा सकता है और कैसे विभिन्न संस्थानों को एक साझा मंच पर लाया जा सकता है।
चार हफ्ते बाद होगी सुनवाई
शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद के लिए निर्धारित की है। याचिका में केंद्र, राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे लापता एवं बचाए गए बच्चों के लिए उचित वैधानिक सुरक्षा उपायों के साथ एक राष्ट्रीय डीएनए और बायोमीट्रिक पहचान प्रणाली स्थापित करें, ताकि वैज्ञानिक मिलान और पहचान की बहाली संभव हो सके।
साथ ही सभी अज्ञात बचाए गए बच्चों और लापता बच्चों के इच्छुक जैविक माता-पिता या अभिभावकों का डीएनए नमूना लेना अनिवार्य किया जाए।


