नागपुर में 23 वर्षीय ओम भोयर जिम में भारी डेडलिफ्ट वर्कआउट के कुछ घंटों बाद ओम अपने घर में बेहोश होकर गिर पड़े। इस दौरान उनकी मां की सतर्कता ने उसे लकवाग्रस्त होने से बचा लिया।जांच में 23 वर्षीय युवक के मस्तिष्क में रक्त का थक्का पाया गया, जिसे मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी प्रक्रिया का उपयोग करके हटा दिया गया।
दरअसल, ओम भोयर ने नागपुर के एक जिम में डेडलिफ्ट करने के अपने प्रयासों का एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो के पोस्ट में लिखा, “कई बार हारा, लेकिन हार मानना कोई विकल्प नहीं है। मैं तब तक कोशिश करता रहूंगा, जब तक जीत न जाऊं।”
घर पहुंचने पर हो गया बेहोश
कुछ घंटों बाद, 10 अप्रैल को जब वह घर पहुंचे, तो वह बेहोश हो गए। ओम भोयर की मां आरती भोयर, जो पेशे से नर्स हैं, समझ गईं कि उनके बेटे को संभवतः मस्तिष्क रक्तस्राव के कारण लकवा का दौरा पड़ रहा है और नुकसान को ठीक करने का ‘गोल्डन आवर’ तेजी से बीत रहा है।
तुरंत अस्पताल जाने पर मिली मदद
‘गोल्डन आवर’ चिकित्सीय स्थितियों में अत्यंत महत्वपूर्ण शुरुआती 3-4 घंटे होते हैं। उनकी मां उन्हें तुरंत अस्पताल ले गईं। जांच में उनके मस्तिष्क में रक्त का थक्का पाया गया, जिसे मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी प्रक्रिया द्वारा हटा दिया गया। इससे उनके मस्तिष्क में रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से बहाल हो गया, जिससे उनके ठीक होने में मदद मिली।
मां के समय पर हस्तक्षेप के कारण, ओम भोयर के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें 21 अप्रैल को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
क्या होती है दिक्कत?
रक्तस्रावी स्ट्रोक, जिसमें मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है और आसपास के ऊतकों में रक्त रिसने लगता है, मस्तिष्क के संबंधित भागों और जुड़े हुए शरीर के अंगों के बीच का संबंध तोड़ सकता है। इससे संबंधित अंगों में लकवा हो जाता है। समय पर उपचार से, दवा या सर्जरी के माध्यम से मस्तिष्क से जमा हुआ रक्त निकाला जा सकता है, जिससे लकवे के प्रभाव को कम किया जा सकता है और ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है।


