सारण जिला परिषद अध्यक्ष पद के लिए 29 अप्रैल को प्रस्तावित चुनाव एक बार फिर संशय के घेरे में आ गया है। जिला पदाधिकारी-सह-जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) वैभव श्रीवास्तव द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग से कई अहम बिंदुओं पर मार्गदर्शन मांगे जाने के बाद चुनाव टलने की संभावना प्रबल हो गई है। इस घटनाक्रम ने जिले की सियासत का तापमान अचानक नीचे ला दिया है।
सियासी पारा चढ़ा, फिर अचानक ठंडा:
अध्यक्ष पद के चुनाव की तिथि घोषित होते ही जिला परिषद की राजनीति गरमा गई थी। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए थे। दावेदारी को लेकर खेमेबाजी चरम पर पहुंच गई थी। लेकिन जैसे ही चुनाव पर संशय के बादल मंडराने लगे, राजनीतिक हलचल भी थमने लगी है।
पार्षदों की रणनीतिक यात्रा चर्चा में:
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, चुनाव की तिथि तय होते ही कई जिला परिषद सदस्य जिले से बाहर निकल गए थे। बताया जाता है कि कुछ पार्षद नेपाल और सिलीगुड़ी जैसे स्थानों की ओर रवाना हो गए, ताकि विरोधी खेमे की पहुंच से दूर रह सकें। इस दौरान कई पार्षदों के मोबाइल भी स्विच आफ रहे, जिससे संपर्क साधना मुश्किल हो गया था।
अब, जब चुनाव टलने की संभावना बढ़ी है, तो बाहर गए पार्षदों की वापसी शुरू हो गई है। इसे लेकर जिले में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
डीएम के पत्र से बढ़ी असमंजस की स्थिति:
जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में राज्य निर्वाचन आयोग से मार्गदर्शन मांगा है। उनका कहना है कि चुनाव से जुड़े कुछ बिंदुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश आवश्यक हैं। इस पहल के बाद प्रशासनिक स्तर पर असमंजस की स्थिति बन गई है और चुनाव की तय तिथि पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
अध्यक्ष के चुनाव पर पहले भी लग चुकी है रोक:
यह पहला मौका नहीं है जब अध्यक्ष पद के चुनाव पर संशय की स्थिति बनी हो। इससे पहले दिसंबर 2025 में भी चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद कोर्ट के आदेश से प्रक्रिया रोक दी गई थी। अब दूसरी बार ऐसी स्थिति बनने से पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता और बढ़ गई है।
प्रशासन के तैयारियों के बीच अनिश्चितता:
राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 29 अप्रैल को समाहरणालय सभागार में विशेष बैठक बुलाकर चुनाव कराने की तैयारी की जा रही थी। प्रशासन ने इसकी वीडियोग्राफी कराने और पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट दो दिनों के भीतर आयोग को भेजने की योजना बनाई थी।
इतना ही नहीं, चुनाव के दिन ही नव निर्वाचित अध्यक्ष को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाने की भी तैयारी थी। लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इन तैयारियों पर ब्रेक लगा दिया है।
अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से जारी है खींचतान:
जिला परिषद अध्यक्ष पद को लेकर लंबे समय से जारी खींचतान अब भी थमती नजर नहीं आ रही है। इस चुनाव को लेकर मामला पटना हाई कोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां कानूनी लड़ाई के बाद चुनाव की तिथि घोषित की गई थी। हालांकि, अब एक बार फिर इस प्रक्रिया पर रोक लगने की आशंका गहरा गई है।
इस अनिश्चितता का असर जिले के विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी साफ देखा जा रहा है। ऐसे में पूरे जिले की निगाहें इस चुनाव पर टिकी थीं, लेकिन ताजा हालात संकेत दे रहे हैं कि इंतजार अभी और लंबा खिंच सकता है।


