चुनाव टलता देख दावेदारों ने बदली चाल, खर्च पर लगाम

 पंचायत चुनाव की सरगर्मी छह महीने पहले ही गांव-गांव में अपने चरम पर पहुंच गई थी। संभावित प्रत्याशी होर्डिंग, बैनर-पोस्टर लगाने में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में थे। शादी-विवाह से लेकर तेरहवीं और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों में आर्थिक मदद कर मतदाताओं को साधने की कोशिशें तेज थीं।

कई दावेदार अपने खर्च पर धार्मिक स्थलों के दर्शन करा रहे थे तो कहीं भंडारे और दावतों का दौर चल रहा था। लेकिन अब जब यह साफ हो गया है कि पंचायत चुनाव तय समय पर नहीं होंगे, तो पूरे जिले में चुनावी रणनीति ने अचानक नया मोड़ ले लिया है।

चुनाव टलने की खबर के बाद दावेदारों ने खर्च पर लगाम कसनी शुरू कर दी है। पहले जहां हर दिन दावतें और बड़े आयोजन होते थे, अब वहां सन्नाटा दिखने लगा है। हालांकि चुनावी मैदान में उतर चुके दावेदार पीछे हटने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए उन्होंने अपनी रणनीति बदलते हुए भौतिक उपस्थिति बढ़ा दी है। अब वे गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संपर्क साध रहे हैं और मीठी बातों के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। मांगलिक कार्यक्रमों के साथ ही तेरहवीं आदि में उपस्थिति बढ़ी है।

बड़हलगंज ब्लाक के बैरियाखास गांव में पहले नौ दावेदार सक्रिय थे और चुनावी माहौल इतना गरम था कि मुर्गा-मीट की दावतें आम बात हो गई थीं। लेकिन, अब चुनाव दूर खिसकता देख सभी प्रत्याशी शांत हो गए हैं और खर्चीले आयोजनों की जगह सामान्य जनसंपर्क पर ध्यान दे रहे हैं।

इसी तरह जलकर में दर्जन भर संभावित प्रत्याशी और कोइलीखाल में आधा दर्जन दावेदारों ने भी खर्च कम कर दिया है। चौतीसा गांव में सात संभावित प्रत्याशी अब चुप्पी साधे हुए हैं, लेकिन सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी पहले से अधिक हो गई है।

पिपरौली ब्लाक के पिपरौली, मल्हीपुर, बनौडा, कालेसर, राउत पार, जैतपुर, भगवानपुर, भीटी खोरिया, कैली और खरैला गांवों में भी कुछ महीने पहले तक चुनावी सरगर्मी जोरों पर थी। प्रत्याशी बिना बुलाए शादियों में पहुंच रहे थे, दूल्हे की गाड़ियों से लेकर बैंड-बाजा तक का इंतजाम कर रहे थे। अब वही दावेदार खर्च घटाकर सीमित दायरे में प्रचार कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के जरिए मतदाताओं से जुड़ाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

ग्राम पंचायतों का कार्यकाल अगले माह समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनाव टलने से दावेदारों की चिंता बढ़ गई है। कैंपियरगंज की ग्राम पंचायत सूरस के दावेदारों का कहना है कि लगन का समय शुरू हो चुका है, ऐसे में चुनाव टलने से खर्च और बढ़ेगा। तेंदुआ बिसम्भरपुर में भी दावेदार मानते हैं कि समय पर चुनाव हो जाता तो अनावश्यक खर्च रुक जाता, लेकिन अब मतदाताओं को साधे रखने के लिए लगातार खर्च करना पड़ेगा। चुनाव की तारीखों और आरक्षण सूची को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी दावेदारों की रणनीति को प्रभावित किया है।

कई प्रत्याशी पहले ही लाखों रुपये खर्च कर चुके हैं और अब उन्हें दोबारा तैयारी करनी पड़ सकती है। ऐसे में समर्थकों को एकजुट बनाए रखना भी चुनौती बनता जा रहा है। कैंपियरगंज के राजपुर गांव के भी संभावित प्रत्याशियों में बेचैनी साफ दिख रही है। उनका कहना है कि खर्च की गणित ही बिगड़ गई। उम्मीद थी कि पांच छह महीने ही जेब पर भार रहेगा लेकिन अब कब तक और कितना खर्च होगा, यह सोचकर ही सिर दर्द करने लगा है। बीमारी, दुर्घटना और सामाजिक आयोजनों में भाग लेना मजबूरी है, जिससे खर्च बढ़ना तय है।

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