जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया। इस दौरान देश दुनिया में न जाने कितनी चीजें बदल गई, लेकिन उस दर्दनाक हमले की याद आज भी कई परिवारों की नींद उड़ा रही है। ऐसी ही एक दर्दनाक कहानी कर्नाटक के बेंगलुरु में रहने वाली डॉ. सुजाता और उनके 5 साल के बेटे की है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. सुजाता आज भी समय को ‘पहले’ और ‘बाद’ में बांटकर देखती हैं। दरअसल, हमले में उनके पति भरत भूषण की जान चली गई थी, वह कहती हैं कि “उनके जाने से अब बस एक खालीपन बचा है। उन्होंने अपनी भावनाएं खो दी हैं, अपनी मुस्कान खो दी है। MBA ग्रेजुएट भरत भूषण, उनकी भाग दौर वाली डॉक्टर की जिंदगी को पूरा करते थे। भरत दुनिया को जानते थे और वह अपने मरीजों को जानती थी। वे दोनों एक-दूसरे को संतुलित करते थे। अब, उनके पास भावनात्मक सहारा नहीं है।”
बेटे और पत्नी के सामने गई थी भरत की जान
उन्होंने आगे कहा, उनके साढ़े चार साल के बेटे ने, जिसने इस हमले को अपनी आंखों से देखा था, जिस तरह से प्रतिक्रिया दी है, वह उन्हें सुकून भी देती है और चिंता भी। वह याद करते हुए कहती हैं, “उसने अपने पिता को गोली लगते हुए देखा था। हम दोनों के कपड़ों पर खून के छींटे पड़े थे। वह बार-बार कह रहा था, ‘पापा को चोट लगी है, बहुत खून बह रहा है।”
डॉ. सुजाता का कहना है कि, “वे इस सदमे से उबरने के लिए, सुबह से रात तक खुद को काम में व्यस्त रखती है। अगर वे खाली बैठती है, तो उनके मन में बार-बार उसी भयानक घटना की तस्वीर आने लगती है।” उन्होंने आगे कहा, “अपने बेटे के लिए उन्होंने जान-बूझकर रविवार का दिन खाली रखा है। उसे मेरी जरूरत है। उसे पता है कि उसके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं उसे लगातार किसी न किसी काम में व्यस्त रखती हूं। उसके साथ खेलती हूं और उसे पढ़ाती हूं। मेरा परिवार इस मुश्किल समय में हमेशा से साथ खड़ा है।”
अप्रैल के महीने में भरत का जन्मदिन भी था
अप्रैल का महीना, जो कभी खुशियों और जश्न का महीना हुआ करता था, अब उनके लिए गम और उदासी का महीना बन गया है। हमले से कुछ ही दिन पहले, 14 अप्रैल को परिवार ने मिलकर भरत का जन्मदिन मनाया था। वहीं, हमलावरों को लेकर उन्होंने कहा कि, उनका ब्रेनवॉश किया गया था, ताकि वे यह मान लें कि वे जो कर रहे हैं, वह सही है। जबकि, यह पूरी तरह से गलत है।


