राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को एक राष्ट्रीय सलाह जारी की है। इसमें तत्काल और समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, क्योंकि बाल विवाह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
एनसीडब्ल्यू ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह संज्ञानात्मक और गैर-जमानती अपराध है और ऐसे विवाहों को सुविधाजनक बनाने में शामिल सभी व्यक्तियों जैसे दूल्हे, पुजारी, कार्यक्रम आयोजक व स्थल प्रदाता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। अपराधियों को दो साल तक की जेल और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने कुछ क्षेत्रों में बाल विवाह की निरंतरता पर गंभीर ¨चता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे मामले अक्षय तृतीया के दौरान पारंपरिक मान्यताओं और सामूहिक विवाह समारोहों के आयोजन के कारण बढ़ जाते हैं। एनसीडब्ल्यू ने शनिवार को एक बयान में कहा, ”बाल विवाह (रोकथाम) अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी निषेध के बावजूद ये प्रथाएं जारी हैं, जो युवा लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र कल्याण के लिए गंभीर जोखिम पैदा करती हैं।”
राज्यों को दी गई सलाह
अध्यक्ष ने सभी राज्यों/संघ शासित प्रदेशों के डीजीपी को कानून के सख्त प्रवर्तन को सुनिश्चित करने के लिए लिखा है। यह सलाह राज्य महिला आयोग की अध्यक्षों के साथ साझा की गई है, जिसमें उन्हें बाल विवाह की रोकथाम में सतर्क पर्यवेक्षक के रूप में कार्य करने के लिए कहा गया है।
आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे बाल विवाह (रोकथाम) अधिनियम, 2006 का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें और जिला मजिस्ट्रेटों, पुलिस अधीक्षकों और बाल विवाह रोकथाम अधिकारियों से सतर्क रहने और मामले की पहचान पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा है।
इसने संवेदनशील जिलों में गहन जागरूकता अभियानों, स्थानीय निकायों, एनजीओ और सामुदायिक नेताओं के साथ सहयोग करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है ताकि मामलों की पहचान और रोकथाम की जा सके, और समय पर हस्तक्षेप के लिए 1098 और 112 जैसे हेल्पलाइनों और नियंत्रण कक्षों को सक्रिय किया जा सके।


