कहते हैं कि समय और अनुभव इंसान को निखारते हैं। कलाकारों को यही अनुभव अपने पात्र को विश्वसनीय बनाने में काम आते हैं। गैर फिल्मी पृष्ठभूमि से आने वाली अभिनेत्री सान्या मल्होत्रा इसका बेहतरीन उदाहरण हैं। फिल्म दंगल से अपने करियर की मजबूत शुरुआत करने वाली सान्या आज हिंदी सिनेमा का एक भरोसेमंद नाम बन चुकी हैं। इस साल वह अपने फिल्मी सफर के दस साल पूरे कर रही हैं।
10 साल के सफर पर बोलीं
इस सफर के दौरान उन्होंने शकुंतला देवी, बधाई हो, लूडो, पगलैट, जवान, मिसेज जैसी कई शानदार फिल्मों का हिस्सा बनीं। यह सफर सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि सीख, प्रयोग और निरंतर विकास की कहानी भी है। वह हालिया रिलीज फिल्म टोस्टर में नजर आई हैं। इसमें उनके साथ राजकुमार राव और पत्रलेखा प्रमुख भूमिका में हैं।
अपने सफर में मिली सबसे अहम सलाह को लेकर सान्या कहती हैं- इस फिल्म के दौरान अर्चना मैम मे काफी कुछ जानने-समझने का मौका मिला। उनसे सीखा कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। चाहे कुछ भी हो जाए, अगर मौके नहीं मिलते हैं तो खुद अपने मौके बनाओ। यह सबसे खूबसूरत सलाह है। साथ ही, खुद को विविध बनाना (डायवर्सिफाई करना) भी बहुत जरूरी है। मिसाल के तौर पर आप अगर अभिनय के साथ फिल्म निर्माण में उतरते हैं तो इससे उसी इंडस्ट्री में आपने खुद को एक और क्षेत्र में फैला लिया है।
हिंदी सिनेमा में कई बेहतरीन कॉमेडियन है। टोस्टर में सान्या के हिस्से में कुछ कामिक सीन भी आए हैं। कटहल अभिनेत्री का मानना है कि कॉमेडी करना आसान नहीं होता है। वह कहती हैं कि कॉमेडी दिखने में जितनी आसान लगती है उतनी होती नहीं है। मैं सुनील ग्रोवर जी का उदाहरण देना चाहूंगी।
मैं उनकी कॉमेडी की प्रशसंक हूं। मुझे लगता है कि वह हमारे पास मौजूद बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं और जो काम वह करते हैं, उसमें बेहद शानदार हैं। जिस तरह से वह मिमिक्री करते हैं वह आसान नहीं होता। कॉमेडी कोई आसान चीज नहीं है। किसी को हंसाना आसान नहीं होता।
पैसा खर्च करने पर सोचती हूं- सान्या
टोस्टर फिल्म में सान्या महाकंजूस रमाकांत (राजकुमार) की पत्नी की भूमिका में सान्या हैं, लेकिन असल जिंदगी में वह काफी सोच-समझकर खर्च करने वाली इंसान हैं। असल जिंदगी में किन छोटी-छोटी चीजों के प्रति जुनूनी हैं?
इस सवाल के जवाब में सान्या कहती हैं- मुझे माचा बहुत पसंद है। माचा एक खास तरह की ग्रीन टी होती है, जो जापान से आती है। यह सामान्य ग्रीन टी से अलग होती है क्योंकि इसमें चाय की पत्तियों को पीसकर बारीक पाउडर बना दिया जाता है, जिसे सीधे पानी या दूध में मिलाकर पिया जाता है। मेरा खुद का ब्रांड है। अच्छी बात यह है कि मैं उससे भी पैसे कमा रही हूं।
वहीं पैसा खर्च करने को लेकर सान्या कहती हैं- सामान खरीदने को लेकर अक्सर दिमाग में सवाल यही आता है कि एक खरीदूं या दो। यह अक्सर होता है। मुझे कोई घरेलू उपकरण खरीदना है या उदाहरण के तौर पर नया मोबाइल लेना है तो मैं पहले अपने माता पिता को फोन करके पूछती हूं कि यह लेना चाहिए या नहीं। यह अब मेरी आदत बन गई है।


