रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) की पहली आवासीय योजना को भले ही अभी अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। भमरौआ क्षेत्र में विकसित की जा रही इस गेटेड कालोनी में अभी आधे से अधिक प्लाट खाली पड़े हैं। ऐसे में प्राधिकरण एक बार फिर से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर आवंटन को गति देने की तैयारी कर रहा है। संभावना है कि अगले दो से तीन महीनों के भीतर नए सिरे से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
1289 में से सिर्फ 320 प्लाट आवंटित
आरडीए द्वारा इस योजना को विकसित करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक से 100 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था। इसमें से 80 करोड़ रुपये की राशि प्राधिकरण चुका है, जबकि शेष 20 करोड़ रुपये पर ही वर्तमान में ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि योजना के तहत विकसित किए गए कुल 1289 भूखंडों में से अब तक केवल 320 का ही आवंटन हो सका है। बाकी 969 प्लाट अभी भी खरीदारों की प्रतीक्षा में हैं।
बचे 969 भूखंडों के लिए जल्द नई प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी
प्राधिकरण के अधिकारियों का मानना है कि पहली बार में आवेदन प्रक्रिया के दौरान जागरूकता की कमी और कुछ तकनीकी कारणों के चलते अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं मिल सके। अब नई रणनीति के तहत प्रचार-प्रसार बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग योजना का लाभ उठा सकें। इसी के साथ आरडीए अपनी अन्य परियोजनाओं को भी तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा है।
व्योमकेश परियोजना को जल्द जमीन पर उतारने के लिए निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। परियोजना क्षेत्र में सड़कों का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जबकि मुख्य गेट का निर्माण कराने को जल्दी टेंडर जारी होने की संभावना है।
विकास के लिए 40 करोड़ रुपये के कार्य कराए जा रहे
इसके अलावा पेयजलापूर्ति व सीवर जैसी सुविधाओं के लिए कार्य कराए जा रहे हैं। पानी की टंकी के निर्माण समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े आंतरिक विकास के करीब 40 करोड़ के कार्य कराए जा रहे हैं। प्राधिकरण का दावा है कि सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराकर इस कॉलोनी को एक आधुनिक और आकर्षक आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें पूर्ण विकसित होने में दो से तीन वर्ष लगने की उम्मीद है।
नई आवेदन प्रक्रिया से इस योजना को रफ्तार मिलने की उम्मीद है
आरडीए की यह पहल शहर के लोगों को बेहतर आवासीय विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन खाली पड़े प्लाट प्राधिकरण के सामने चुनौती भी बने हुए हैं। अब नई आवेदन प्रक्रिया से इस योजना को रफ्तार मिलने की उम्मीद है। इसी को ध्यान में रखकर इसे आरंभ कराने की तैयारी है।


