राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वार्षिक क्षमता संवर्धन के लिए सेवाकालीन प्रशिक्षण इस वर्ष भी अनिवार्य होगा।
शिक्षा विभाग ने करीब साढ़े तीन लाख शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
एससीईआरटी को दिया प्रशिक्षण माड्यूल निर्माण का निर्देश
मॉड्यूल का उद्देश्य ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करना है, जो कक्षाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो और शिक्षण को अधिक प्रभावी बना सके।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण मॉड्यूल का निर्माण एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद मई के पहले सप्ताह से जिला स्तर पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होगा।
यह प्रशिक्षण जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के माध्यम से आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण का शेड्यूल जिला स्तर पर तय किया जाएगा।
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी विद्यालय से एक साथ अधिक संख्या में शिक्षक प्रशिक्षण के लिए न बुलाए जाएं, ताकि पढ़ाई बाधित न हो।
जिला स्तर पर मिलेगा प्रशिक्षण
मॉड्यूल निर्माण में डायट के व्याख्याताओं, विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के अलावा सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन की विशेषज्ञ टीम भी शामिल होगी।
एससीईआरटी के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य इसे केवल सैद्धांतिक न रखकर कक्षा में व्यवहारिक रूप से लागू करना है।
इसके तहत शिक्षक कक्षा-स्तर की रणनीतियों को समझेंगे, उनका अभ्यास करेंगे और उन्हें अपने दैनिक शिक्षण कार्य में उपयोग कर सकेंगे।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कक्षा 1 और 2 के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, इसके बाद कक्षा 3 से 5 तक के शिक्षकों को शामिल किया जाएगा।


