झारखंड उच्च न्यायालय के निर्दशों के अनुपालन में गुरुवार को रामगढ़ जिला प्रशासन ने रजरप्पा मंदिर प्रक्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू की गई है। अवैध रूप से लगी सैकड़ों दुकानों को बलपूर्वक हटाया गया।
एक तरफ इस कार्रवाई से रजरप्पा मंदिर क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान कुछ दुकानदारों ने विरोध करने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के आगे उनकी कुछ नहीं चली। चारो ओर कोहराम मच गया। देखते देखते सैंकड़ों लोगों की रोजीरोटी छिन गयी।
दूसरी तरफ श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अब दोगुनी चौड़ी जगहों का लाभ मिलने लगा है। इससे न केवल आवागमन में सुविधा बढ़ेगी, बल्कि मंदिर क्षेत्र का सौंदर्य भी बढ़ेगा। इस दौरान मंदिर परिसर में वर्षों से संचालित 254 दुकानों को जेसीबी और बुलडोजर के माध्यम से हटाया गया।
इस कार्रवाई से जहां प्रशासन की सख्ती साफ नजर आयी, वहीं सैकड़ों दुकानदारों के सामने आजीविका का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया। गुरुवार की सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुए इस अभियान के दौरान पूरा मंदिर परिसर पुलिस छावनी में तब्दील रहा। बड़ी संख्या में पुलिस बल, दंडाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात दिखे, ताकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के बीच अभियान शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा सके।
कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर का दृश्य पूरी तरह बदल गया। जहां पहले दुकानों की कतार और श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, वहां अब मलबे के ढेर और बिखरे सामान नजर आये। कई दुकानदार अपने टूटते आशियाने को देखकर भावुक हो उठे। बताया जाता है कि रजरप्पा मंदिर के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गयी है।
वर्षों से यहां अनियोजित तरीके से दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे परिसर में अव्यवस्था बढ़ गयी थी। इसी को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी। उसी के आलोक में उच्च न्यायालय ने मंदिर प्रक्षेत्र के 254 दुकानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया गया।
कार्रवाई से पहले प्रशासन ने दुकानदारों को पूर्व सूचना दी थी। 13 अप्रैल को अंचल निरीक्षक पवन यादव के नेतृत्व में माइकिंग कर न्यायालय के आदेश की जानकारी दी गयी थी और सहयोग की अपील की गयी थी। इसके बाद 15 अप्रैल की शाम से ही अधिकांश दुकानदारों ने अपनी दुकानों से आवश्यक सामान हटा लिया था। अभियान का नेतृत्व एसडीओ अनुराग तिवारी और डीएसपी मुख्यालय चंदन वत्स ने किया।
कार्रवाई के बाद मंदिर परिसर का दृश्य पूरी तरह बदल गया। जहां पहले दुकानों की कतार और श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, वहां अब मलबे के ढेर और बिखरे सामान नजर आये। कई दुकानदार अपने टूटते आशियाने को देखकर भावुक हो उठे। बताया जाता है कि रजरप्पा मंदिर के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गयी है।
वर्षों से यहां अनियोजित तरीके से दुकानें संचालित हो रही थीं, जिससे परिसर में अव्यवस्था बढ़ गयी थी। इसी को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी। उसी के आलोक में उच्च न्यायालय ने मंदिर प्रक्षेत्र के 254 दुकानों को हटाने का आदेश जारी किया गया था। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्णय लिया गया।
कार्रवाई से पहले प्रशासन ने दुकानदारों को पूर्व सूचना दी थी। 13 अप्रैल को अंचल निरीक्षक पवन यादव के नेतृत्व में माइकिंग कर न्यायालय के आदेश की जानकारी दी गयी थी और सहयोग की अपील की गयी थी। इसके बाद 15 अप्रैल की शाम से ही अधिकांश दुकानदारों ने अपनी दुकानों से आवश्यक सामान हटा लिया था। अभियान का नेतृत्व एसडीओ अनुराग तिवारी और डीएसपी मुख्यालय चंदन वत्स ने किया।
सूत्रों के अनुसार, कुछ दुकानदारों ने मौके पर विरोध करने की कोशिश की, लेकिन प्रशासनिक सख्ती के आगे उनकी एक भी नहीं चली। देखते ही देखते मंदिर क्षेत्र के अवैध कब्जे को हटाया गया है। अतिक्रमण हटाने के बाद अब यहां साफ सुथरी और चौड़ी दिखने लगी है। जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई प्रस्तावित पुनर्विकास योजना के तहत की जा रही है।
प्रशासन का उद्देश्य मंदिर परिसर को आधुनिक, स्वच्छ और सुव्यवस्थित बनाना है, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। भविष्य में यहां पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा की बेहतर व्यवस्था विकसित की जाएगी। रजरप्पा में चली यह कार्रवाई एक ओर विकास की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर सैकड़ों परिवारों के जीवन को प्रभावित करने वाली घटना भी है।
प्रशासन का दावा है कि इस तरह की कार्रवाई से रजरप्पा मंदिर की सुंदरता बढ़ेगी और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। जबकि पीड़ित दुकानदारों ने प्रशासन से वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने पुनर्वास और रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
क्या कहते हैं दुकानदार संघ के अध्यक्ष कुलदीप साव
अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाने के दौरान प्रभावित दुकानदारों ने इस कार्रवाई पर गहरी पीड़ा जताई है। रजरप्पा मंदिर परिसर सर्वांगीण विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष कुलदीप साव ने कहा कि सभी दुकानदार न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन इससे उनकी रोजी-रोटी छिन गयी है। उन्होंने न्यायालय से पुनर्वास की मांग करते हुए कहा कि यदि व्यवस्थित रूप से बसाया जाये, तो वे दोबारा अपनी आजीविका शुरू कर सकते हैं।
दुकानों पर बुलडोजर चलने पर रोते हुए दुकानदारों ने कहा, पुनर्वास का कार्य करे प्रशासन
रजरप्पा के दुकानों पर बुलडोजर चलने पर कई दुकानदारों के आंखों में आंसू आ गए। रोते हुए दुकानदार ने कहा कि हमलोगों के पूर्वजों द्वारा 40-50 वर्षों से यहां अपनी दुकानें चलाते आ रहे हैं। दुकान टूटने से हमलोगों के समक्ष रोजी रोटी की भारी समस्या उत्पन्न हो गई। प्रशासन को उजाड़ने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था करना चाहिए था।


