जॉर्जिया में लोगों के लिए खोला गया जोसेफ स्टालिन का तहखाना, सामने आईं दुर्लभ फ्रेंच वाइन की 40 हजार बोतलें

 तिबिलिसी की सड़कों के बहुत नीचे, भारी दरवाजों और सालों की खामोशी के पीछे एक ऐसा संग्रह मौजूद है जिसे बहुत कम लोगों ने देखा है। धूल से ढकी बोतलें। धुंधले लेबल। पत्थर की छतों से लटकते जाले और एक ऐसी कहानी जो 20वीं सदी की सबसे विवादित हस्तियों में से एक से जुड़ी है।

दशकों तक सोवियत नेता जोसेफ स्टालिन से जुड़ा वाइन का एक विशाल संग्रह आम लोगों की नजरों से काफी हद तक छिपा रहा। अब जॉर्जियाई सरकार ने पहली बार इस तहखाने को खोला है, जिसमें दुर्लभ फ्रेंच और जॉर्जियाई वाइन की लगभग 40,000 बोतलें सामने आई हैं।

200 साल से ज्यादा पुरानी बोतलें

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कुछ बोतलें कथित तौर पर 200 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं। इस कदम ने संग्रहकर्ताओं, इतिहासकारों और वाइन के शौकीनों सभी के बीच दिलचस्पी जगा दी है।

इसको लेकर एक दिलचस्प सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर उस तहखाने के अंदर ठीक-ठीक क्या छिपा है, जिसे एक ऐसे व्यक्ति ने तैयार किया था जिसका नाम आज भी दुनिया के बड़े हिस्से में तीखी प्रतिक्रियाएं पैदा करता है?

गुप्त वाइन तहखाने के अंदर क्या मिला?

इस हफ्ते इस अंडरग्राउंड तहखाने में प्रवेश करने वाले आगंतुकों का स्वागत एक ऐसे दृश्य ने किया जिस पर आधुनिक जीवन का कोई असर नहीं दिखता। पुरानी बोतलें दूर तक फैली हुई हैं। कई बोतलों के लेबल धूल से ढके हैं, जिनमें से कुछ तो मुश्किल से ही पढ़े जा सकते हैं।

कहा जाता है कि वहां की हवा में एक मीठी और मिट्टी जैसी महक घुली हुई है जो अक्सर पुराने वाइन तहखानों से जुड़ी होती है। माना जाता है कि इस संग्रह में सोवियत संघ के दौर में जमा की गई कुछ बेहतरीन वाइन शामिल हैं। फ्रेंच विंटेज वाइन जॉर्जियाई वाइन के साथ रखी है जो शाही पसंद और स्टालिन के अपनी मातृभूमि से गहरे जुड़ाव, दोनों को दर्शाती है।

जॉर्जिया लंबे समय से खुद को वाइन की जन्मभूमि के तौर पर बढ़ावा देता रहा है। पुरातत्विक सबूतों से पता चलता है कि इस इलाके के लोग करीब 8,000 सालों से वाइन बना रहे हैं। यह इतिहास इस खोज में एक और दिलचस्प पहलू जोड़ता है। यह तहखाना खुद किसी म्यूजियम के उस नमूने जैसा लगता है, जो गलती से कई पीढ़ियों तक बंद पड़ा रहा।

स्टालिन इस कलेक्शन के रखवाले कैसे बने?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वाइन कलेक्शन के पीछे की कहानी शाही रूस के जमाने से जुड़ी है। इस तहखाने का कुछ हिस्सा असल में रोमानोव राजवंश का था। फ्रांस की मशहूर वाइन एस्टेट्स से वाइन जार अलेक्जेंडर III ने जमा की थीं और बाद में उनके बेटे निकोलस II ने।

1917 की रूसी क्रांति के बाद सब कुछ बदल गया। शाही कलेक्शन को सोवियत सरकार ने जब्त कर लिया। समय के साथ यह स्टालिन की देखरेख में आ गया। इतिहासकारों का मानना है कि सोवियत नेता को वाइन में खुद दिलचस्पी थी और उन्होंने धीरे-धीरे इस तहखाने को जॉर्जिया की वाइन से भर दिया। यहीं 1878 में उनका जन्म हुआ था।

स्टालिन ने 1924 से लेकर 1953 में अपनी मौत तक सोवियत संघ की बागडोर संभाली। उनके शासन ने देश को पूरी तरह बदल दिया, लेकिन साथ ही यह दमन, सफाया अभियानों और बड़े पैमाने पर लोगों की तकलीफों से भी जुड़ गया।

इसी विरासत की वजह से उनसे जुड़ा वाइन का संग्रह भी ऐतिहासिक महत्व रखता है। यह सिर्फ बोतलों की बात नहीं है, बल्कि उस दौर की बात है जिसमें ये बोतलें सुरक्षित रहीं।

जॉर्जिया इसे क्यों बेचना चाहता है?

इस संग्रह को छिपाकर रखने के बजाय जॉर्जियाई अधिकारियों ने एक अलग रास्ता चुना है। सरकार का इरादा इस तहखाने (सेलर) के कुछ हिस्सों की नीलामी करने और उससे मिलने वाली रकम का इस्तेमाल वाइन शिक्षा का एक स्कूल खोलने में करने का है।

इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय वाइन बाजार में जॉर्जिया की साख मजबूत हो सकती है। वाइन निर्माता इराक्ली गिलाउरी का मानना है कि इस नीलामी से जॉर्जिया गंभीर वाइन संग्राहकों की नजर में मजबूती से अपनी जगह बना पाएगा।

हालांकि, हाल के वर्षों में जॉर्जियाई वाइन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी पहचान मिली है फिर भी इस देश को वाइन निर्यात करने वाले उन बड़े और ज्यादा स्थापित देशों से मुकाबला करना पड़ता है, जो इस क्षेत्र में पहले से ही अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं।

स्टालिन के वाइन संग्रह से जुड़ी यह नीलामी वाइन के पारंपरिक शौकीनों के दायरे से बाहर भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच सकती है। इस पर अब पूरी दुनिया की नजर होगी।

स्टालिन का ऐतिहासिक वाइन कलेक्शन इतना कीमती क्यों है?

उस वॉल्ट (तिजोरी) तक पहुंच पाने वालों में वाइन कलेक्टर विक्टर चेन भी शामिल थे, जो इन बोतलों को देखने के लिए टेक्सास के डलास से आए थे। धूल से भरी अलमारियों के बीच खड़े होकर उन्होंने इस अनुभव की तुलना किसी छिपी हुई पुरातात्विक जगह की खोज करने से की। उनकी यह प्रतिक्रिया इस कलेक्शन को लेकर बनी अनिश्चितता की भावना को बखूबी दर्शाती है।

अभी तक किसी को भी हर बोतल की पूरी कीमत का अंदाजा नहीं है। हो सकता है कि कुछ बोतलें बेहद दुर्लभ निकलें। वहीं, यह भी संभव है कि सावधानी से रखे जाने के बावजूद समय के साथ कुछ बोतलों की गुणवत्ता खराब हो गई हो।

यह रहस्य ही शायद इस कलेक्शन के आकर्षण का एक हिस्सा है। कलेक्टर अक्सर वाइन की गुणवत्ता के साथ-साथ उसके इतिहास (Provenance) को भी उतना ही महत्व देते हैं। किसी बड़ी ऐतिहासिक घटना से जुड़ी बोतल सिर्फ उसके स्वाद से कहीं बढ़कर, अन्य कारणों से भी बेहद कीमती बन सकती है।

स्टालिन के वाइन कलेक्शन का भविष्य

रॉयटर्स के अनुसार, जैसे-जैसे नीलामी की तैयारियां आगे बढ़ रही हैं विशेषज्ञ संभवतः कई महीने लगाकर हर एक बोतल की स्थिति और उसके ऐतिहासिक महत्व का आकलन करेंगे। कुछ चीजें अच्छी-खासी रकम दिला सकती हैं। वहीं, कुछ अन्य चीजें ऐसे संग्रहालयों और निजी संग्रहकर्ताओं को आकर्षित कर सकती हैं, जिनकी दिलचस्पी वाइन में नहीं बल्कि सोवियत या शाही रूसी इतिहास में है।

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