मोबाइल फोन और इंटरनेट मीडिया का प्रयोग युवा वर्ग अधिक कर रहे हैं। अभिभावक इससे परेशान भी हैं।
वहीं, दूसरी ओर डिजिटल प्लेटफार्म पर ज्ञान का भंडार भी है। स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक की अध्ययन सामग्री एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाती है। ई-लर्निंग प्लेटफार्म की यह विशेषता विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी है। मेधावी छात्र-छात्राएं डिजिटल माध्यमों की इस सुविधा का भरपूर उपयोग कर सफलता की कहानी लिख रहे हैं।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से बुधवार को जारी किए गए हाईस्कूल के परिणाम के बाद स्कूलों के टापरों से मिली प्रतिक्रिया में भी यह बात सामने आई। मेधावियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर चैटिंग से दूरी बनाई और रीडिंग में ई-लर्निंग प्लेटफार्म को भी सारथी बनाया।
सिंथिया स्कूल की छात्रा निहारिका तिवारी ने बताया कि उन्होंने इंटरनेट मीडिया पर वीडियो व्याख्यानों की सहायता ली। इंस्पिरेशन स्कूल की छात्रा स्मृति सिंह ने बताया कि शिक्षकों के पढ़ाए अध्यायों का रोजाना अध्ययन किया। साथ ही आनलाइन टेक्स्ट सामग्री से भी मदद ली। इसी स्कूल की कनिका पांडे ने आनलाइन कोचिंग से भी तैयारी की।
वहीं, शिक्षकों ने भी डिजिटल मोड पर विद्यार्थियों को काफी अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई। जो छात्र-छात्राओं के लिए मददगार साबित हुई। साथ ही टापरों सोशल नेटवर्किंग के अन्य प्लेटफार्म से दूर रहे। जिससे उनकी पढ़ाई में भटकाव की स्थिति नहीं बनी और बच्चों ने लक्ष्य तय कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किया।


