सरकार ने बदली रणनीति, अब नहीं तोड़ा जाएगा दिल्ली का ‘मनहूस बंगला’; कई VIP का रहा ठिकाना

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दिल्ली सरकार का लोक निर्माण विभाग सिविल लाइंस इलाके में स्थित मनहूस 33 शामनाथ मार्ग बंगले का नवीनीकरण करने की योजना बना रहा है। यह दो-मंजिला इमारत सालों से खाली पड़ी है। इसे आवंटित किए जाने पर अधिकारी इसमें रहने से कतराते रहे हैं।

एक बड़े भूखंड में फैला यह बंगला चार बेडरूम, कई ड्राइंग रूम, एक विशाल लिविंग एरिया, फव्वारे, सामने के लॉन, एक आउटहाउस और 7 स्टाफ क्वार्टर से युक्त है। सरकार इस बंगले को पहले तोड़ने की योजना बना रही थी, मगर अब इसमें बदलाव किया गया है। इसे तोड़ने की योजना फिलहाल अभी टाल दी गई है। जमीन को समतल करने, फाल्स सीलिंग ठीक करने और बंगले के अंदर विशेष हिस्से बनाने के लिए टेंडर जारी किया गया है।

क्या है सरकार की योजना?

योजना के अनुसार, पानी की पाइपलाइन की मरम्मत, खराब टाइलों को हटाने और कार पार्किंग क्षेत्र को ठीक करने जैसे अन्य काम भी इस योजना का हिस्सा हैं। इस परियोजना पर अनुमानित 56 लाख रुपये की लागत आएगी और काम शुरू होने के 30 दिनों में पूरा किया जाएगा।

बंगले में न कोई CM टिका न ही मंत्री

इस बंगले में कभी दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश रहते थे। उन्होंने 1952 में पदभार संभालने के बाद यहां रहना शुरू किया था, लेकिन एक कथित घोटाले के चलते अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 1955 में इस्तीफा दे दिया था।

1993 में दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने के बाद यह बंगला मदन लाल खुराना को आवंटित किया गया था। खुराना इस बंगले में रहने के लिए तो नहीं आए, लेकिन यहां से अपना दफ्तर चलाते थे, वे भी अपना पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए और 1996 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

2013 में यह बंगला दिल्ली सरकार के तत्कालीन प्रधान सचिव (बिजली) शक्ति सिन्हा को आवंटित किया गया था। उन्होंने चार महीने के भीतर ही इसे छोड़ दिया। दिल्ली के पूर्व उद्योग मंत्री दीपचंद बंधु को भी यह बंगला आवंटित किया गया था। 2003 में पद पर रहते हुए ही उनका निधन हो गया था।

इतिहास से जुड़ा यह बंगला

बताया जाता है कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने इस मनहूस बंगले के बजाय मथुरा रोड पर स्थित एक बहुत छोटे बंगले में रहना पसंद किया था। इतिहास से जुड़ा यह बंगला 1920 के दशक का है, जब अंग्रेजों ने सिविल लाइंस को वरिष्ठ अधिकारियों के लिए आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया था। यहां रहने वाले कई लोगों के खराब अनुभव के आधार पर इस बंगले को मनहूस बंगला कहा गया है।

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