महा विकास अघाड़ी सरकार को गिराने वाली बगावत के चार साल बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) एक और बड़ी टूट की कगार पर है। गुरुवार को पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने संसदीय दल की बैठक में नहीं पहुंचे, जो उनके पार्टी छोड़ने का स्पष्ट संकेत है।
इन असंतुष्ट सांसदों ने बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की ताकि उनके अलग होने और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले सत्ताधारी शिवसेना गुट में विलय को औपचारिक रूप दिया जा सके।
पार्टी की आधिकारिक बैठक में केवल तीन सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे और राज्यसभा सांसद संजय राउत ही शामिल हुए, जिससे संसदीय दल के भीतर गहरे विभाजन की पुष्टि हो गई है।
विचारधारा से भटक कांग्रेस में विलय का दावा
एनडीटीवी के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष के साथ अपनी बैठक के दौरान छह बागी सांसदों ने दावा किया कि ठाकरे गुट बाल ठाकरे द्वारा स्थापित पार्टी की मूल विचारधारा से भटक गया है। बागियों ने चिंता व्यक्त की कि शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता चुपचाप विपक्षी गठबंधन में अपनी सहयोगी कांग्रेस के साथ पूरी तरह से विलय की योजना बना रहे हैं।
इस संभावित विलय को पार्टी छोड़ने का मुख्य कारण बताते हुए, सांसदों ने स्पीकर बिरला से अनुरोध किया कि उन्हें सदन में एकनाथ शिंदे गुट के सात सांसदों के पास ही सीटें आवंटित की जाएं।
नेतृत्व से नाराजगी की शिकायत
यह बगावत कई महीनों से पर्दे के पीछे पक रही थी, जिसका मुख्य कारण उद्धव ठाकरे की नेतृत्व शैली के प्रति बढ़ता असंतोष था। सूत्रों का कहना है कि हालिया चुनावों के दौरान बागी सांसदों ने खुद को उपेक्षित महसूस किया और चुनाव के समय समर्थन व संगठनात्मक मदद की भारी कमी का आरोप लगाया।


