हिमाचल में जमीन के अंदर घुल रही सीवरेज, मंडी में 23 बोरवेल के सैंपल फेल; सैकड़ों लोग पीलिया से हुए ग्रस्त

 हिमाचल प्रदेश में भी जमीन के अंदर सीवरेज घुल रही है। जिला मंडी के गोहर में 23 बोरवेल के सैंपल फेल पाए गए हैं। उपमंडल गोहर में बढ़ते पीलिया के मामलों में यह चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। स्वास्थ्य और जलशक्ति विभाग की ओर से की गई जांच में पता चला है कि बोरवेल और डग वैल का पानी पीने योग्य नहीं रहा है।

20 से 30 मीटर गहराई में भी गंदगी

हैरानी की बात यह है कि जमीन के अंदर मात्र 20 से 30 मीटर की गहराई पर ही पानी में सीवरेज की गंदगी मिलने की पुष्टि हुई है। लोगों ने बिना किसी विभागीय जांच के 163 बोरवेल स्थापित कर लिए हैं जो अब बीमारियों का स्रोत बन रहे हैं।

जांच में क्या सामने आया

जांच में पाया गया कि स्थानीय लोगों ने घरों में सीवरेज टैंक और डग वैल के बीच निर्धारित दूरी के मानकों का पालन नहीं किया है। जहां यह दूरी सुरक्षित होनी चाहिए थी, वहीं कई स्थानों पर सीवरेज टैंक और पानी के स्रोत के बीच मात्र चार से पांच मीटर का फासला है। इसी लापरवाही के कारण भूमिगत जल प्रदूषित हो गया है।

163 लोगों को नोटिस जारी किए

जल शक्ति विभाग ने इस मामले में कड़ा संज्ञान लेते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले 163 लोगों को नोटिस जारी कर दिए हैं। क्षेत्र में पीलिया का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है।

गोहर में 283 लोग हो चुके पीलिया से संक्रमित

गोहर में पीलिया का एक और मामला सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 283 तक पहुंच गई है। वर्तमान में चार मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग लगभग 50 संदिग्ध मरीजों पर पैनी नजर रखे हुए है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए एफएसएसएम (मल कीचड़ और सेप्टेज प्रबंधन) प्लांट की डीपीआर में बदलाव का निर्णय लिया गया है। अब लगभग 10 करोड़ रुपये से इस प्लांट को तैयार किया जाएगा, जिससे 15,000 से अधिक आबादी को सुरक्षित सीवरेज प्रबंधन की सुविधा मिल सकेगी।

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