एक डॉक्टर का कागज, उस पर बदली हुई कुछ स्याही…और उसी स्याही ने एक शिक्षिका के तर्कों को जिलाधिकारी के सामने ध्वस्त कर दिया।
बीएलओ ड्यूटी में अनुपस्थित रहने के बाद वेतन रुकने से परेशान महिला शिक्षक जब अपनी सफाई लेकर जिलाधिकारी के सामने पहुंची, तो शायद उसे अंदाजा नहीं था कि उसकी एक छोटी-सी चूक उसे बड़ी कार्रवाई के मुहाने पर ला खड़ा करेगी।
डॉक्टर के पर्चे पर ओवरराइटिंग करने और लगातार वरिष्ठ अधिकारी के सामने झूठ बोलने के मामले में जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को शिक्षिका की जांच करके कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
दो महीने पहले का है मामला
मामला 18 जनवरी 2026 का है, जब जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह विकास नगर स्थित जुगलदेवी सरस्वती इंटर कालेज के बूथ संख्या 243 का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान बीएलओ ड्यूटी पर तैनात सहायक अध्यापक उपासना सिंह ड्यूटी से गायब मिलीं थीं।
एसआइआर जैसे संवेदनशील कार्य में लापरवाही पर डीएम ने उनका वेतन रोकने के आदेश दिए थे। शिक्षिका ने बीमारी का हवाला देकर वेतन जारी कराने का प्रयास किया। सोमवार को शिक्षिका प्रार्थना पत्र लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय में जिलाधिकारी के सामने पहुंचीं।
प्रार्थनापत्र में उन्होंने बच्चों के बीमार होने का हवाला देते हुए डाक्टर का पर्चा लगाया। दावा किया गया कि बीमारी के कारण वह ड्यूटी पर नहीं पहुंच सकीं थी। जिलाधिकारी की नजर जैसे ही उस पर्चे पर पड़ी तो गड़बड़ी का अहसास हुआ। कागज पर लिखी तारीख और विवरण में ओवरराइटिंग साफ झलक रही थी।
स्याही के अलग-अलग रंग और लिखावट की असमानता ने संदेह को यकीन में बदल दिया। डीएम ने जब इस पर सवाल उठाया, तो शिक्षिका पहले तो जवाब देने से बचती रहीं, फिर बहस पर उतर आईं। कार्यालय का माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।
एक तरफ प्रशासनिक सख्ती, दूसरी तरफ अपनी बात मनवाने की जिद। काफी देर तक समझाने के बाद भी जब शिक्षिका अपने तर्कों पर अड़ी रहीं, तो जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए शिक्षिका को कड़ी फटकार लगाई।
इसके साथ ही उन्होंने बेसिक शिक्षा अधिकारी सुरजीत कुमार सिंह को मामले की जांच करके नियमानुसार कार्रवाई के आदेश दिए। शिक्षिका शिवराजपुर के भटपुरा विद्यालय में तैनात हैं, लगातार बीएलओ ड्यूटी का विरोध कर रही थीं और वेतन जारी कराने का दबाव बना रही थीं।


