फर्जी फर्म पंजीकृत कर कूटरचित बिलों के जरिए करीब 10.23 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी करने वाले दो आरोपियों को राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार किया है। मामले में आगे की कार्रवाई जारी है।
राज्य कर विभाग के सहायक आयुक्त संदीप कुमार सिंह की तहरीर पर 25 अगस्त 2025 को नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि मीना इंटरप्राइजेज नामक फर्म द्वारा बिना वास्तविक व्यापार किए जीएसटी पोर्टल पर फर्जी रिटर्न दाखिल कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का अवैध लाभ लिया गया और आगे अन्य फर्मों को भी कागजी लेन-देन दिखाकर पास आन किया गया।
विवेचना के दौरान इस संगठित कर चोरी गिरोह में शामिल शुभम गुप्ता पुत्र राजकुमार गुप्ता निवासी मुहल्ला पटेल नगर कोतवाली फतेहपुर बाराबंकी और नेक आलम पुत्र अकरम निवासी पटेलनगर जहांगीराबाद थाना बिसवां जिला सीतापुर के नाम प्रकाश में आए।
दोनों आरोपियों को पांच अप्रैल 2026 को एसआईटी टीम ने गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने सुनियोजित तरीके से बोगस कंपनियां बनाकर कागजी लेन-देन दर्शाया, फर्जी बिल तैयार किए और विभिन्न कंपनियों के बीच काल्पनिक कारोबार दिखाकर बड़े पैमाने पर आईटीसी का अवैध लाभ लिया।
इस पूरे नेटवर्क से सरकारी राजस्व को 10,23,66,540 रुपये की क्षति पहुंचाई गई। गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने इनके पास से मीना इंटरप्राइजेज, छैल ट्रेडर्स व रतन इंटरप्राइजेज से संबंधित फर्जी बिल व दस्तावेज, एक डेल कंपनी का लैपटाप, दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस, छह एटीएम कार्ड, एक बाइक बरामद की।
इस कार्रवाई में एसआईटी टीम के उपनिरीक्षक इंद्रभानु राय, अभिलाख सिंह, अश्वनी पांडेय और हरिनाथ सिंह शामिल रहे। अधिकारियों के अनुसार मामले में अन्य संभावित आरोपियों और नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


