ChatGPT का कमाल, एक आम आदमी ने AI की मदद से बना डाली अपने पालतू कुत्ते के लिए कैंसर की वैक्सीन

AI के भविष्य को लेकर उम्मीद और चिंता के बीच झूलती एक बातचीत में, OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने एक ऐसी कहानी सुनाई जो पहली बार सुनने पर लगभग अविश्वसनीय लगती है। ‘Mostly Human’ पॉडकास्ट पर बोलते हुए, ऑल्टमैन ने बताया कि कैसे एक आम इंसान, जो न तो वैज्ञानिक है और न ही मेडिकल एक्सपर्ट, उसने ChatGPT का इस्तेमाल करके अपने पालतू कुत्ते के लिए एक खास कैंसर वैक्सीन बनाई। उन्होंने कहा कि ये उदाहरण दिखाता है कि AI टूल्स कितने पावरफुल होते जा रहे हैं और वे लोगों के मुश्किल समस्याओं को हल करने के तरीके को कैसे बदल सकते हैं।

इस बातचीत में AI के भविष्य से जुड़े बड़े सवालों पर भी चर्चा हुई, जिनमें नौकरियां, सुरक्षा और समाज पर इसका असर शामिल था। लेकिन ये एक कहानी सबसे अलग और खास थी। ऑल्टमैन ने बताया कि उस हफ्ते उनकी सबसे ‘शानदार मुलाकात’ एक ऐसे व्यक्ति से हुई, जो ऑस्ट्रेलिया से सफर करके आया था। उसने ChatGPT का इस्तेमाल करके अपने कैंसर से पीड़ित कुत्ते के लिए एक पर्सनलाइज़्ड mRNA वैक्सीन डिजाइन की थी।

एक व्यक्ति ने अपने कुत्ते के लिए कैंसर वैक्सीन बनाने के लिए ChatGPT का इस्तेमाल किया

ऑल्टमैन के मुताबिक, वह व्यक्ति मेडिकल या रिसर्च बैकग्राउंड से नहीं था। फिर भी, ChatGPT का इस्तेमाल करके, वह अपने कुत्ते की बीमारी के हिसाब से एक वैक्सीन बनाने का पूरा प्रोसेस समझने में कामयाब रहा। इसमें जरूरी जेनेटिक सीक्वेंस की पहचान करना और ये समझना शामिल था कि ऐसी वैक्सीन कैसे बनाई जा सकती है।

ऑल्टमैन ने बताया कि वह व्यक्ति सिर्फ थ्योरी तक ही सीमित नहीं रहा। उसने आगे बढ़कर ऐसे एकेडमिक रिसर्चर्स और प्रोफेसर्स से संपर्क किया, जो लैब में जरूरी काम को पूरा करने में उसकी मदद कर सकें। इस प्रोजेक्ट के पीछे की मेहनत का जिक्र करते हुए ऑल्टमैन ने कहा, ‘वह ChatGPT का पूरी तरह से इस्तेमाल करके वो काम करने में कामयाब रहा, जिसके लिए आम तौर पर एक पूरे रिसर्च इंस्टीट्यूट की जरूरत पड़ती है।’

ऑल्टमैन के मुताबिक, इसका नतीजा ये निकला कि कुत्ते की जान बच गई। अब रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो व्यक्ति इस तरीके को दूसरे ऐसे पालतू जानवरों की मदद के लिए भी इस्तेमाल करने के तरीके खोज रहा है, जो इसी तरह की बीमारियों से जूझ रहे हैं।

वैसे ये कहानी AI का सकारात्मक पहलू दिखाती है, लेकिन साथ ही यह कुछ गंभीर चिंताएं भी खड़ी करती है। पॉडकास्ट के दौरान, होस्ट ने ये बात उठाई कि अगर कोई व्यक्ति AI का इस्तेमाल करके वैक्सीन बना सकता है, तो मुमकिन है कि दूसरे लोग भी इसी तरह के टूल्स का गलत इस्तेमाल करके नुकसान पहुंचाने वाले बायोलॉजिकल एजेंट्स (जैविक हथियार) बना लें। ऑल्टमैन ने इस जोखिम को स्वीकार करते हुए कहा कि AI डेवलपर्स के लिए सुरक्षा हमेशा से ही एक बड़ी चिंता का विषय रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि OpenAI जैसी कंपनियां अपने सिस्टम में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पर काम कर रही हैं, लेकिन असलियत ये है कि AI टूल्स अब आम लोगों की पहुंच में आते जा रहे हैं और उन सभी पर एक जैसी पाबंदियां लागू नहीं होंगी।

उन्होंने ‘AI रेजिलियंस’ (AI लचीलेपन) की जरूरत पर जोर दिया। यानी एक ऐसी दुनिया जहां सिस्टम न सिर्फ गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए तैयार हों, बल्कि अगर कुछ गलत हो जाए तो तेजी से जवाब देने के लिए भी तैयार हों। इसमें बीमारियों का तेजी से पता लगाना, इलाज का तेजी से विकास करना और बेहतर ग्लोबल तैयारी शामिल है।

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