बिहार के मोतिहारी में स्थापित गोबर्धन गैस प्लांट स्थापना काल के बाद से ही संकट के दौर से गुजर रहा है। पचास लाख की लागत से दो साल पूर्व कोटवा के मच्छरगांवा में स्थापित यह प्लांट बदहाली के दौर से गुजर रहा है।
यह अपने उद्देश्यों को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। सरकारी स्तर पर इसके संचालन के लिए कई बार प्रयास किए गए, पर हर बार प्रयास विफल साबित हुआ।
वर्तमान में जिस प्रकार पूरा विश्व ऊर्जा संकट की आशंका से चिंतित है। इस परिवेश में जिले में स्थापित गोबर्धन गैस प्लांट की प्रासंगिकता बढ़ जाती है।
अगर इस प्लांट को बेहतर तरीके से संचालन कर इसका उपयोग किया जाता तो निश्चित रूप से इसका लाभ आम लोगों को मिल रहा होता। अब एक बार फिर इस प्लांट को चलाने को लेकर जिला प्रशासन ने पहल की है।
जीविका दीदीयों को दी जाएगी 5 एकड़ जमीन
अब इस GOBARdhanPlant को चलाने की जिम्मेदारी जीविका को दी गई है। बताया गया कि इस प्लांट को चलाने के लिए गो पालन किया जाएगा। इसके लिए जीविका ने पांच एकड़ भूमि की मांग की है, जिसे प्रशासनिक स्तर पर मुहैया कराई जा रही है।
इस भूमि में जीविका की महिलाएं गाय का पालन करेंगी, जहां से गोबर्धन गैस प्लांट के लिए गोबर प्राप्त होगा। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी पशुपालकों से गोबर की खरीदारी की जाएगी।
गोबर गैस से बनती थी बिजली
बताया गया कि पर्याप्त मात्रा में गोबर नहीं मिलने के कारण प्लांट बंद हुआ। बताया गया कि प्रारंभिक समय में जब गोबर्धन गैस प्लांट का शुभारंभ हुआ, तब इससे विद्युत का उत्पादन किया गया।
इससे आसपास के गांवों में स्ट्रीट लाइट लगाई गई। भविष्य में इससे गैस के उत्पादन की योजना थी, पर प्लांट के बंद होने से विद्युत उत्पादन पर भी ब्रेक लग गया।
साथ ही प्लांट भी बदहाली की स्थिति में आ गया। अब नए सिरे से जीविका को प्रशिक्षित कर जिम्मेदारी सौंपने के बाद एक बार फिर इस प्लांट से उत्पादन प्रारंभ होने की उम्मीद बढ़ गई है।


