राजधानी लखनऊ में नया शैक्षिक सत्र आरंभ हो गया है। इस बार 530 फिटनेस फेल और 168 बिना परमिट वाहनों से बच्चों का आवागमन होगा।
यह स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है क्योंकि स्कूल संचालकों ने सत्र शुरू होने से पहले बच्चों को परिवहन कराने वाले वाहनों का फिटनेस परीक्षण नहीं कराया है। इसके अतिरिक्त, स्कूलों में 91 ऐसे वाहन भी हैं जो अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुके हैं, फिर भी उन्हें चलाया जा रहा है।
राजधानी लखनऊ में, जहां अच्छी शिक्षा के नाम पर विद्यालय मोटी फीस वसूलते हैं, वहीं वे अपने वाहनों की फिटनेस को लेकर गंभीर नहीं हैं। जिन बच्चों का स्कूल घर से दूर है, उनमें से अधिकांश स्कूल वाहन से ही आते-जाते हैं। अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने बच्चों के स्कूल प्रबंधन से यह सुनिश्चित करें कि उनके वाहन पूरी तरह से फिट हैं या नहीं।
अनफिट वाहनों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है। परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधकों को एक, दो और तीन नोटिसें भेजी हैं। लखनऊ में परिषदीय विद्यालयों के अलावा लगभग छह सौ से अधिक निजी स्कूल संचालित हैं, और हर स्कूल वाहन का प्रतिवर्ष फिटनेस कराना अनिवार्य है।
स्कूल वाहनों के फिटनेस का कार्य आमतौर पर स्कूल खुलने से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी विद्यालयों को परिवहन विभाग की ओर से निर्देश भी जारी किए गए हैं। राजधानी में स्कूल के वाहनों के अलावा ऐसे भी वाहन चल रहे हैं जो विद्यालय से संबद्ध हैं, लेकिन उनकी स्थिति की जांच करने वाला कोई नहीं है।
एआरटीओ प्रशासन प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि जिन स्कूलों ने अपने वाहनों का फिटनेस और परमिट नहीं लिया है, उन्हें तीन बार नोटिस भेजा जा चुका है। अब ऐसे विद्यालयों को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा। यदि नोटिस प्राप्त वाहनों में बच्चे आवागमन करते पाए गए, तो एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।
वाहनों में यह जरूरी
स्कूल वाहनों के लिए नई नियमावली बनाई गई है, जिसमें वाहनों का रंग, सुरक्षित स्थान पर बच्चों को बैठाने और उतारने के निर्देश, सीसी कैमरा, लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस, और गति सीमा यंत्र शामिल हैं, जिसमें अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार होगी। ड्राइवर का मोबाइल फोन नंबर भी होना चाहिए।
स्कूलों में ऐसे चल रहे वाहन
वाहन का प्रकार – कुल वाहन – बिना फिटनेस – बिना परमिट
स्कूल वाहन – 1797 – 126 – 49
अनुबंधित वाहन – 2962 – 404 – 119
कुल – 4759 – 530 – 168


