हथनीकुंड बैराज की सुरक्षा के लिए 146 करोड़ रुपये की लागत से बनाए जा रहे डायफ्राम वाल (सुरक्षा दीवार) का निर्माण कार्य की चाल धीमी है। कार्य शुरू हुए एक वर्ष बीत जाने के बाद भी मात्र 65 प्रतिशत तक ही सिमट कर रह गया है।
निर्माण की धीमी गति और एजेंसी की लापरवाही को लेकर अब विभागीय स्तर पर भी चिंता बढ़ने लगी है। बैराज के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में खिसकाव की समस्या को देखते हुए इसकी मजबूती और सुरक्षा के लिए डायफ्राम वाल का निर्माण किया जा रहा है।
इस दीवार का उद्देश्य बरसात के दौरान संभावित जल दबाव और कटाव से बैराज को सुरक्षित रखना है ताकि किसी भी प्रकार की आपदा से बचाव किया जा सके। यह परियोजना सिंचाई विभाग की देखरेख में चलाई जा रही है। केंद्रीय जल आयोग भी इसकी मानिटरिंग कर रहा है। इसके बावजूद निर्माण कार्य की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार निर्माण एजेंसी के पास न तो पर्याप्त मात्रा में भारी मशीनरी उपलब्ध है और न ही पर्याप्त मैनपावर, जिसके चलते कार्य प्रभावित हो रहा है। तकनीकी दृष्टि से इस परियोजना में लगभग 100 मीटर की गहराई तक खोदाई की आवश्यकता है। जिसके लिए अत्याधुनिक और भारी मशीनों का उपयोग अनिवार्य है। मौके पर कैट-300 और कैट-500 जैसी अपेक्षाकृत छोटी मशीनों से ही कार्य चलाया जा रहा है।
जिसके कारण खोदाई की गति बार-बार बाधित हो रही है। बताया जा रहा है कि एजेंसी अब तक कैट-900 जैसी भारी मशीन साइट पर नहीं ला पाई है जो इस प्रकार के गहरे निर्माण कार्य के लिए जरूरी मानी जाती है। मशीनरी की कमी के कारण कई बार कार्य रुक-रुक कर चला। जिससे तय समय सीमा में काम पूरा करना मुश्किल होता जा रहा है।
सिंचाई मंत्री कर चुकी दौरा, जताई थी नाराजगी
मामले को लेकर सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी भी पहले ही नाराजगी जता चुकी हैं। पिछले बरसाती सीजन के तुरंत बाद उन्होंने स्वयं हथनीकुंड बैराज का दौरा किया था। निर्माण कार्य में हो रही देरी को लेकर अधिकारियों और एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई थी। मंत्री के निर्देशों के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्य की गति में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया है।
लापरवाही बरतने पर होगी कार्रवाई
सिंचाई विभाग के एसई प्रवीण कुमार गुप्ता ने बताया कि अब तक लगभग 65 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। एजेंसी को 31 मई तक हर हाल में कार्य पूरा करना होगा। इस बारे निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही एजेंसी को मशीनरी और मैनपावर बढ़ाने के लिए भी कहा गया है। एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


