सिंगरौली।NCL की निगाही परियोजना एक बार फिर विवादों में घिरती नजर आ रही है। परियोजना के कोयला कांटा नंबर-7 पर कथित रूप से “चिप” मिलने की चर्चा ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। मामले के सामने आने के बाद अब परियोजना के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनकी जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार मामला तब सामने आया जब कोयला लोड वाहनों के वजन में लगातार अंतर दिखाई देने लगा। बताया जा रहा है कि कई वाहनों के वजन में असामान्यता पाए जाने के बाद संबंधित कांटे की तकनीकी जांच कराई गई। जांच के दौरान कांटा नंबर-7 में कथित रूप से एक “चिप” मिलने की जानकारी सामने आई, जिसके बाद परियोजना में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
हालांकि, सूत्रों का दावा है कि मामले को गंभीरता से लेने के बजाय जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इसे “शार्ट सर्किट” बताकर दबाने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, मामले को लेकर अलग-अलग स्तर पर सफाई देने के लिए तरह-तरह की “स्क्रिप्ट” भी तैयार की जा रही है, ताकि पूरे प्रकरण को तकनीकी खराबी बताकर शांत किया जा सके।

वजन में अंतर से खुला मामला
जानकारी के मुताबिक कोयला कांटे पर वाहनों की माप-तौल में लगातार अंतर समझ में आने के बाद कर्मचारियों और संबंधित विभाग के लोगों को संदेह हुआ। इसके बाद तकनीकी जांच कराई गई। सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान सामने आए तथ्यों ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि कांटे पर वास्तव में कोई बाहरी “चिप” या संदिग्ध उपकरण मिला है, तो वह वहां तक पहुंचा कैसे? क्या यह केवल तकनीकी गड़बड़ी थी या फिर कोयला माप-तौल में किसी बड़े खेल का हिस्सा?
खदान प्रबंधक के बयान से बढ़ा संदेह
मामले में जब खदान प्रबंधक आर.के. सिंह से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें ऐसी किसी भी घटना की जानकारी नहीं है। खदान प्रबंधक के इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। क्योंकि, परियोजना से जुड़े जानकार बताते हैं कि कोयला कांटे में किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी, छेड़छाड़ अथवा संदिग्ध गतिविधि पाए जाने पर इसकी जानकारी तत्काल सेल्स ऑफिसर, खदान प्रबंधक, परियोजना अधिकारी और महाप्रबंधक तक पहुंचाई जाती है। इसके बाद E&M विभाग को सूचित कर हेडक्वार्टर से तकनीकी टीम बुलाई जाती है। सूत्रों का कहना है कि हेडक्वार्टर से आई टीम संबंधित कांटे में सुधार कार्य कर रही है। ऐसे में यदि खदान प्रबंधक यह कह रहे हैं कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है, तो यह अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
पहले भी विवादों में रह चुके हैं सेल्स ऑफिसर
सूत्र बताते हैं कि परियोजना के सेल्स ऑफिसर पूर्व में भी विभिन्न विवादों को लेकर चर्चाओं में रहे हैं। ऐसे में कांटा नंबर-7 पर कथित चिप मिलने की जानकारी ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं कोयला माप-तौल में गड़बड़ी कर NCL को आर्थिक नुकसान तो नहीं पहुंचाया जा रहा था।
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद अब कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं—
- अगर कांटे पर “चिप” मिली है तो उसे वहां किसने लगाया?
- क्या कोयला वजन में हेराफेरी कर कंपनी को नुकसान पहुंचाया जा रहा था?
- क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत थी?
- आखिर परियोजना के अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से क्यों बच रहे हैं?
- क्या जांच के बाद दोषियों पर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई होगी?
- क्या परियोजना प्रमुख संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज करवाएंगे?
- क्या सच में खदान प्रबंधक इस पूरे मामले से अनजान हैं या फिर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है?
फिलहाल पूरे मामले को लेकर परियोजना प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन जिस तरह से तकनीकी टीम लगातार कांटे पर काम कर रही है और जिम्मेदार अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बच रहे हैं, उससे मामला और अधिक संदिग्ध होता जा रहा है। अब देखना होगा कि प्रबंधन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाता है या फिर मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।


