अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत और अमेरिका के बीच ‘दोनों पक्षों के लिए लाभकारी’ आर्थिक विकास और सुरक्षा सहयोग को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का मुख्य स्तंभ बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल बुनियादी ढांचे की जरूरतें, ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में अमेरिकी विशेषज्ञता के साथ पूरी तरह मेल खाती हैं।
आर्थिक एकीकरण और सप्लाई चेन एक प्रतिष्ठित पत्रिका को दिए साक्षात्कार में राजदूत गोर ने कहा, दोनों देश सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए लचीली सप्लाई चेन बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच सुरक्षित नेटवर्क के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाली ‘पैक्स सिलिका’ पहल में भारत के शामिल होने का स्वागत किया।
व्यापार समझौता आर्थिक एकीकरण का आधार बनेगा- गोर
गोर ने जोर देकर कहा कि अमेरिका, दक्षिण और मध्य एशिया में आर्थिक विकास के ”मुख्य सूत्रधार” के रूप में कार्य करने की स्थिति में है और प्रस्तावित व्यापार समझौता क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण के लिए एक शक्तिशाली आधार बनेगा।
रक्षा सहयोग: रणनीतिक साझेदारी की धुरी रक्षा और सुरक्षा सहयोग को इस साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए राजदूत ने कहा कि ‘क्वाड’ के माध्यम से दोनों देशों के सुरक्षा हित मजबूती से जुड़े हुए हैं। उन्होंने मालाबार, टाइगर ट्रायम्फ और कोप इंडिया जैसे सैन्य अभ्यासों का जिक्र करते हुए सैन्य इंटर-ऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर बल दिया।
भारत अमेरिका का एक प्रमुख रक्षा भागीदार- गोर
उनके अनुसार, भारत अमेरिका का एक प्रमुख रक्षा भागीदार है, और सैन्य बिक्री व कूटनीति इस रिश्ते के चमकते हुए बिंदु हैं। सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए दोनों देश आतंकवाद, कट्टरवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राजदूत ने अपने विजन को साझा करते हुए कहा कि वे भारत-अमेरिका संबंधों को 21वीं सदी की ऐसी परिभाषित रणनीतिक साझेदारी में बदलना चाहते हैं, जो दोनों देशों के लिए वास्तविक और ठोस लाभ सुनिश्चित करे।


