दोहरे हत्याकांड के आरोपित अजय प्रताप के पिता राजेश सिंह व ताऊ राकेश सिंह पर रविवार को एक और प्राथमिकी दर्ज कर ली गई। इन दोनों ने ग्राम सभा की 450 वर्गमीटर जमीन पर कब्जा कर मकान बनवा लिया था। अब तक अजय, उसके चार भाइयों, पिता व ताऊ पर सात प्राथमिकी पंजीकृत हो चुकी हैं। इनकी 11 दुकानें ध्वस्त की जा चुकीं, 27 की सीलिंग हुई थी।
बदायूं में ग्राम सभा की 450 वर्गमीटर भूमि पर किया था कब्जा
सैजनी गांव में अजय प्रताप सिंह व उसके स्वजन की हनक थी। उसका ताऊ राकेश सिंह पूर्व प्रधान रह चुका, इसलिए ग्राम सभा की जमीनें कब्जाता रहा। 12 मार्च को अजय प्रताप ने कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट में हिंदुस्तान पेट्रोलियम के उप महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता व सहायक मुख्य प्रबंधक हर्षित मिश्रा की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसकी व स्वजन की संपत्तियों की जांच शुरू हुई।
अजय, चार भाइयों, पिता-ताऊ पर दर्ज हो चुकी सात प्राथमिकी
रविवार को लेखपाल हेमराज सिंह ने पुलिस को बताया कि राकेश सिंह, राजेश सिंह व उसके स्वजन ने ग्राम सभा की 450 वर्गमीटर बंजर भूमि पर कब्जा कर मकान बनवा लिया। इसका उपयोग चौपाल लगाने, विविध आयोजनों में किया जाता था। आरोपित व स्वजन रहते पुराने मकान में हैं।
उनकी तहरीर के आधार पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा 2 व 3, सामान्य आपराधिक अतिचार या कब्जा करने की धारा 329(3) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मूसाझाग थाने के इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि कब्जे में शामिल अन्य लोगों के नाम विवेचना में सामने आएंगे।
हाट से वसूली में अजयपाल का नाम बढ़ा
राकेश व राजेश सिंह ग्राम सभा की भूमि पर अवैध हटा लगवाकर वसूली करता था। इस प्रकरण में भी दोनों आरोपितों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी। इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि जांच में पता चला कि अजयपाल प्रत्येक दुकान से 100-100 रुपये की वसूली कर राकेश, राजेश तक पहुंचाता था। प्राथमिकी में उसका नाम भी शामिल किया गया है।
पूरे परिवार पर कानूनी शिकंजा
दोहरे हत्याकांड के बाद अजय प्रताप पर हत्या की प्राथमिकी हुई थी। उसी रात तमंचा बरामदगी के दौरान पुलिस पर फायरिंग की तो मुठभेड़ पर जानलेवा हमले की एक और प्राथमिकी दर्ज कर जेल भेजा गया। इसके बाद अजय के स्वजन की जांच शुरू हुई। उसका ताऊ पर चोरी की बिजली उपभोग करता था। उसके पिता व ताऊ ने सरकारी जमीनें 13 ग्रामीणों को बेच दीं,
सभी मामलों में केस हुए हैं दर्ज
अवैध दुकानें बनवा लीं। इन सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। अब प्लांट के आसपास की सरकारी जमीनों पर भी कब्जे का अंदेशा गहराया है।


