कलाकार के लिए सीखते रहना ही सबसे बड़ी ताकत है, क्योंकि यहीं से किरदारों में सच्चाई और जीवन में समझ आती है। यह कहना है अभिनेत्री दिव्या दत्ता (Divya Dutta) का जो महिलाओं से जुड़े मजबूत और अर्थपूर्ण रोल निभाने के लिए पहचान रखती है। हाल ही में जियोहाटस्टार की वेब सीरीज चिरैया में दिव्या ने मैरिटल रेप जैसे गंभीर मुद्दे पर बात की है। अक्सर महिलाओं से जुड़ी सशक्त भूमिकाएं दिव्या के पास आती हैं।
इस पर वह कहती हैं कि यह कैसे हुआ पता नहीं, क्योंकि मैं एक ऐसी लड़की रही हूं, जो अपनी मां के दुपट्टे को पकड़कर उनके पीछे खड़े हुआ करती थी। वहीं अपनी दुनिया को सबसे सुरक्षित मानती थी। उसे जिंदगी से जूझना नहीं आता था। धीरे-धीरे मां ने उंगली पकड़कर आगे किया। जब वह इस दुनिया से चली गईं, तब अपना ध्यान खुद रखना था। स्ट्रान्ग रोल निभाए हैं, उसके कारण मेरी छवि एक सख्त महिला की बन गई है। कई बार तो लोग मुझसे बात भी नहीं करते है कि आप स्ट्रान्ग लगती हैं।
कॉमेडी फिल्म करना चाहती हैं दिव्या?
सेट पर सबसे दोस्ती करने में मुझे दो दिन का समय लगता है। सामने से जाकर बात करनी पड़ती है। (हंसते हुए) मुझे लगता है कि अब कामेडी फिल्में करनी चाहिए। इस शो में दिव्या एक ऐसी महिला का रोल कर रही हैं, जो सामाजिक दायरों में ऐसी बंधी है कि उसे सही-गलत को समझने में समय लगता है। किसी के समझाने पर बात समझ भी आ जाती है।
कला को दिल से महसूस करती हूं – दिव्या
अपनी विचारधारा से अलग रोल करने को लेकर दिव्या कहती हैं कि कोई भी सीखकर नहीं आता है, हर कोई अपनी सोच, अपनी विचारधारा, फिर चाहे वह गलत हो या सही उसके अनुसार काम करता है। यह शो लिखा बढ़िया गया है। मेरे सामने मेरे निर्देशक थे, जो मुझे हर कदम पर सही कर रहे थे।
कई बार मन करता था कि मानिटर पर देखकर आऊं। फिर निर्देशक का चेहरा देखकर पता चल जाता था कि शॉट सही है। बाकी स्क्रीन पर आप भी बतौर कलाकार करते हैं, उसे महसूस करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता है, इसका कोई शार्टकट नहीं है।
चिरैया में क्या है दिव्या का किरदार?
किसके समझाने पर दिव्या को बात आसानी से समझ आती है, इस पर वह कहती हैं कि वह हर कोई जो आपका नजरिया जानते हुए भी बिना अपना निर्णय आप पर थोपे, ईमानदारी से समझाए। अगर आप दूसरे का नजरिया जेहन में रखकर अपना बताए कि क्या करना है, तो उसमें से चाहे सौ प्रतिशत न सही, लेकिन कुछ तो सामने वाला समझ ही जाएगा। मेरी मां मुझसे कहा करती थीं, जिंदगी जैसी है, उसे वैसे अपनाना चाहिए। लेकिन मैं बगावती रही हूं।
इस बात को मानने से इन्कार करती थी। खैर, धीरे-धीरे समझ आया की जिंदगी जैसी है, उसे पहले वैसे ही अपनाएं, फिर अपना अगला कदम लेकर उस पर प्रतिक्रिया दें, लेकिन तुरंत नहीं। यह आप खुद सीखते हैं, अपने वक्त, लय के अनुसार जब आपका मन करता है। मैं अपने बड़ों, मुझसे ज्यादा पढ़े-लिखे और जानकार लोगों से सीखती हूं।
किससे इन्किस्योरिटी होती है?
हमारी इंडस्ट्री में कलात्मक तौर पर कई बुद्धिमान लोग हैं। उनके साथ वक्त बिताती हूं, तो मेरा रवैया भी बदलता है। मैं वैसा रोल करती भी हूं, जिससे दूसरों का रवैया बदले, वो कुछ सीखें। इस शो में दिव्या का पात्र इनसिक्योर हो जाता है कि उससे बेहतर बहू घर में आ जाएगी, तो उसे कौन पूछेगा। क्या अभिनय की दुनिया में ऐसा कभी हुआ है? इस पर वह कहती हैं कि सेट पर खुद से बेहतर एक्टर देखकर प्रेरित होती हूं कि क्या कमाल का काम कर गई यार। मैं भी वैसा काम करती?


