प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने मन की बात में बनारस में रिकार्ड 2.51 लाख पौधे लगाने के प्रयास को सराहा

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मन की बात के 132वें संस्करण में रविवार को काशी में एक घंटे में 2.51 लाख पौधे लगाने के रिकार्ड को सराहा। साथ ही कहा कि यह इस बात का प्रमाण है कि लोग एक साथ मिल जाएं तो हर कार्य संभव है। इस कार्य में हजारों लोग जुड़े जिसमें बच्चे, युवा, महिलाएं, सामाजिक संगठन, सुरक्षा कर्मी आदि ने इसे जनभागिदारी कर सफल बनाया। ऐसा ही एक प्रयास एक पेड़ मां के नाम में देश भर में करोड़ों पौधे लगाने के प्रयास को बताया।

काशी में एक मार्च को गंगा पार डोमरी व सूजाबाद में 2.51 करोड़ पौधे लगाए गए। शहरी सीमा में एक घंटे में पौधे लगाने का यह रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज हो गया। यह उपलब्धि पर्यावरण, आध्यात्मिक शांति और आधुनिक अर्थशास्त्र का एक अनूठा उदाहरण है। विश्व रिकार्ड अपने नाम कर यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि काशी न केवल अपनी प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है, बल्कि पर्यावरण जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

गंगा तट पर डोमरी-सूजाबाद में स्थित 350 बीघा क्षेत्र में पौधारोपण के लिए ‘शहरी वन’ की अनूठी विशेषता के लिए पूरी रणनीति बनाई गई थी। पूरे क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के सुप्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेधघाट, ललिताघाट, मणिकर्णिकाघाट, केदारघाट, चौशट्टीघाट, मानमंदिर घाट, शीतलाघाट आदि के नाम पर रखा गया। यह व्यवस्था ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे तो गंगा किनारे एक हरा-भरा ‘मिनी काशी’ का स्वरूप नजर आएगा।

प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है। गुलाब और पारीजात जैसे फूलों वाले पौधे आय बढ़ाएंगे। यह परियोजना न केवल पर्यावरण को सुधारेगी, बल्कि आने वाले समय में नगर निगम के लिए आय का एक बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये तक वार्षिक तक पहुंच सकती है। अब इन पौधों में पत्तियां निकलने लगी हैं। इससे उसका स्वरूप निखर रहा है।

बच्चे, महिला और संगठन-संस्थाओं ने दिया सहयोग
इस विश्व रिकार्ड को बनाने के पीछे महीनों की सूक्ष्म तैयारी और हजारों हाथों का सामूहिक श्रम शामिल रहा। महाभियान में सेना, पीएसी, एनडीआरएफ, सीआरपीएफ, नागरिक सुरक्षा (सिविल डिफेंस), यूपी पुलिस, वन विभाग, कृषि, डूडा और नगर निगम की टीमों ने प्रबंधन की व्यवस्था संभाली। साथ ही महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, यूपी कालेज, देहरादून पब्लिक स्कूल, मुकुलारेंडम स्कूल के हजारों छात्र-छात्राओं, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस के स्वयंसेवकों ने इसे एक जन-आंदोलन में तब्दील कर दिया।

आधुनिक तकनीक और स्मार्ट सिंचाई
पौधों के संरक्षण के लिए खंडवा की राज नर्सरी के विशाल श्रीवास्तव के अनुसार पौधारोपण के पूर्व पूरे क्षेत्र में गोबर की खाद, कोकोपीट, नीम की खली, कंपोस्ट आदि को मिट्टी में मिला कर जुताई की गई थी। समतल कर दो-दो फीट पर पौधे लगाने के लिए गड्ढे खोदे गए। पूरे क्षेत्र में बाड़ लगाई गई है। पौधों को जीवित रखने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। वन क्षेत्र में 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है। 10 बोरवेल और 360 ‘रेन गन’ सिस्टम के जरिए सिंचाई की व्यवस्था की गई है। पौधों को प्राकृतिक वर्षा की तरह पानी मिलेगा। विशाल ने बताया कि बलुई दोमट मिट्टी के कारण पौधों की बढ़वार अच्छी होगी। मियावाकी तकनीक के कारण पौधे तेजी से बढ़ेंगे और मात्र दो से तीन वर्षों में यह क्षेत्र एक सघन ‘आक्सीजन बैंक’ का रूप ले लेगा। विशाल ने दावा किया है कि तीन वर्ष बाद एक भी पौधा कम नहीं होगा। हमने इसके पूर्व खंडवा में 75000 और तीन लाख पौधों को बचाकर तैयार किया है। अब-तक जगह-जगह 10 लाख पौधे लगा चुके हैं।

500 वालंटियर ने की गिनती
गिनीज बुक वर्ल्ड रिकार्ड के प्रतिनिधि ऋषि राज के अनुसार पौधों की गिनती के लिए कई तकनीक अपनाई गई। ड्रोन से निगरानी कर हर सेक्टर में पांच से सात स्कूली बच्चों को वालेंटियर बनाया गया था। टीम के एक दर्जन साथी पूरे कार्य पर निगरानी कर रहे थे। सभी गिनती कर लिंक पर अपलोड कर रहे थे।

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