मिशन गगनयान (जी-वन) को इसी वर्ष प्रक्षेपित किए जाने का लक्ष्य है। जबकि वीनस आर्बिटर मिशन, गगनयान जी-2 और चंद्रयान-4 की बारी अगले साल आएगी। चंद्रयान-4 को अगले वर्ष लॉन्च किए जाने की तैयारियों के साथ ही चंद्रयान-5 मिशन जापान स्पेस एजेंसी के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। जिसे 2028 में प्रक्षेपित किया जाएगा।
शुक्रवार को 1975 में अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए भारत के पहले सेटेलाइट मिशन आर्यभट्ट की स्वर्ण जयंती के मौके पर यूआर राव सेटेलाइट सेंटर इसरो बैंगलुरू के उप निदेशक एनएस मुरली नैनीताल पहुंचे। यहां डीएसबी परिसर में आयोजित समारोह के दौरान जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 भारतीय अंतरिक्ष मिशनों को लेकर महत्वपूर्ण रहेगा।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वर्तमान में कई मिशन एक साथ संचालित कर रहा है। जिनमें वीनस आर्बिटर मिशन (वीओएम), चंद्रयान-4 व गगनयान जी-1 सर्वाधिक महत्वपूर्ण मिशन हैं। गगनयान को तीन चरणों में लॉन्च किया जाएगा।
पहला जी-वन मानव रहित मिशन होगा। इसकी सफलता के बाद ही मानव मिशन का रास्ता साफ हो पाएगा। जी-2 अगले वर्ष भेजे जाने की योजना है जबकि जी-3 को वर्ष 2028 में लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन में अधिक सुरक्षा की जरूरत होने के कारण मामूली तकनीकों पर भी सावधानी बरती जा रही है। इसके अलावा वीनस आर्बिटर मिशन शुक्र ग्रह के वातावरण की जानकारी को लेकर महत्वपूर्ण अभियान होगा।
यह शुक्र के डेढ़ सौ किमी के दायरे में रहकर उसके वातावरण की जानकारी जुटाकर धरती तक पहुंचाएगा। शुक्र अधिक गर्म होने के कारण इसके वातावरण की जटिलताएं बनी हुई हैं। जिन्हें समझना बेहद जरूरी है। यह मिशन धरती के सुरक्षित भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण होगा। इस मिशन को 2028 या 2029 तक लॉन्च किए जाने की योजना है।
अंतरिक्ष मिशन में देश होगा आत्मनिर्भर
डीएसबी परिसर के भौतिक विज्ञान के प्रो. रमेश चंद्रा ने बताया कि अंतरिक्ष योजनाओं को लेकर देश ने बहुत कम समय में बड़ी सफलता हासिल की हैं।
डीएसबी परिसर में इसरो के साथ आयोजित किए जा रहे आर्यभट्ट सेटेलाइट मिशन गोल्डन जुबली समारोह का उद्देश्य प्रोत्साहन भी है। इस कार्यक्रम में नगर के स्कूली बच्चों को शामिल किया गया है। अंतरिक्ष मिशन में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में युवाओं में खगोल विज्ञान के प्रति रूचि जागृत करने में इस तरह के कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं।


