शाहपुर नगर पंचायत का पुरानी बाजार प्रशासन के लिए ‘कामधेनु’ बना हुआ है। आरोप है कि वर्षों से नियमों को दरकिनार कर विभागीय वसूली कराई जा रही है। NH-84 के किनारे बाजार लगवाया जा रहा है, जबकि यह पूरी तरह अवैध है।
दुकानदारों से नियमित रूप से वसूली भी की जा रही है। इस व्यवस्था पर प्रशासन की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अतिक्रमण हटाओ अभियान सिर्फ दिखावा
बताया जाता है कि एक ओर बाजार को अवैध अतिक्रमण बताकर हटाने का अभियान चलाया जाता है। हाल ही में एनएच-84 से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई थी।
लेकिन कुछ ही दिनों में बाजार फिर से उसी स्थान पर सज गया। सब्जी, फल, मीट और अंडे की दुकानें दोबारा लग गईं। इसके साथ ही वसूली का खेल भी फिर शुरू हो गया।
10 साल से नहीं हुई बंदोबस्ती, वसूली जारी
जानकारी के अनुसार पिछले एक दशक से बाजार की बंदोबस्ती नहीं हो सकी है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर वसूली लगातार जारी है।
सरकार और अधिकारी बदलते रहे, लेकिन वसूली का जिम्मा वही लोगों के पास बना रहा। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोग इसे ‘मैच फिक्सिंग’ करार दे रहे हैं।
सुरक्षित जमा राशि बनी बड़ी बाधा
बाजार की बंदोबस्ती नहीं होने की मुख्य वजह सुरक्षित जमा राशि मानी जा रही है। एक वर्ष के लिए यह राशि करीब 5.93 लाख रुपये निर्धारित है।
इतनी आय नहीं होने के कारण कोई भी व्यक्ति नीलामी लेने को तैयार नहीं होता। हैरानी की बात यह है कि नीलामी नहीं होने के बावजूद राशि लगातार बढ़ती रही।
वर्ष 2026-27 के लिए भी यह लगभग इसी स्तर पर बनी हुई है।
राजस्व को हुआ भारी नुकसान
विभागीय वसूली से हर साल केवल 60 हजार से एक लाख रुपये ही सरकारी खाते में जमा होते हैं। जबकि वास्तविक आय इससे कहीं अधिक होने की संभावना जताई जा रही है।
जानकारों के अनुसार पिछले 10 वर्षों में करीब 30 लाख रुपये का राजस्व नुकसान हुआ है। पहले इस बाजार की बंदोबस्ती जिला प्रशासन करता था।
वित्तीय वर्ष 2023-24 में इसे नगर पंचायत को सौंप दिया गया।
नियमों की अनदेखी और कानूनी सवाल
राजस्व विभाग के नियम के अनुसार तीन वर्षों तक बंदोबस्ती नहीं होने पर समीक्षा अनिवार्य है। आय के आधार पर सुरक्षित जमा राशि का पुनर्निर्धारण किया जाना चाहिए।
लेकिन यहां एक दशक से ऐसा नहीं किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति संदेह पैदा करती है।
कानूनी जानकारों के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे बाजार लगाना पूरी तरह अवैध है, इसके बावजूद वसूली जारी है।


