देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए नालंदा जिले के सपूत शहीद हो गए। लद्दाख में तैनात जेसीओ सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज (45) ड्यूटी के दौरान हिमस्खलन (एवलांच) की चपेट में आ गए थे। घटना के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।
देर रात जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
बर्फ में दबने से बिगड़ी थी हालत
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नूरसराय थाना क्षेत्र के मोकरमपुर मिर्चायगंज निवासी सुरेंद्र सिंह के बड़े पुत्र सुमन कुमार सिंह 26 मार्च को ड्यूटी पर तैनात थे।
इसी दौरान अचानक आए भीषण हिमस्खलन के कारण वे बर्फ के नीचे दब गए। सेना के बचाव दल ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला।
इसके बाद उन्हें इलाज के लिए लखनऊ स्थित आर्मी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद 27 मार्च को उन्होंने दम तोड़ दिया।
परिवार में देश सेवा की परंपरा
सुमन कुमार सिंह अपने परिवार के मुख्य सहारा थे और दो भाइयों में बड़े थे। उनके छोटे भाई भी देश सेवा में लगे हैं और वर्तमान में CISF में कार्यरत हैं।
शहीद अपने पीछे पत्नी, दो बेटियां और दो बेटे छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी इंटर में जबकि छोटी बेटी मैट्रिक की छात्रा है।
पिता के बलिदान की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब
शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही विशेष वाहन से गांव पहुंचा, माहौल गमगीन हो गया। ‘शहीद सुमन कुमार अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा।
अपने सपूत को अंतिम विदाई देने के लिए आसपास के कई गांवों से हजारों लोग मोकरमपुर पहुंचे। लोगों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
हर किसी की जुबान पर उनके साहस और बलिदान की चर्चा थी।
राजकीय सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
प्रशासन और सेना के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में शोक का माहौल है और हर आंख नम दिखाई दे रही है।
लोगों ने शहीद के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। देश के लिए दिए गए इस बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।


