अब चार सप्ताह पहले ही मिल जाएगी वेदर रिपोर्ट, मौसम विभाग ने लॉन्च की AI आधारित दो नई सर्विस

कैसे काम करता है ये सिस्टम?

ऑब्जर्वेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर के लगातार विस्तार के साथ ऐसी ही सेवाएं धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों तक भी बढ़ाई जाएंगी। यह पायलट सिस्टम एआई-आधारित एडवांस डाउनस्केलिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है और इसमें ऑटोमेटिक बारिश-मापक यंत्रों, ऑटोमेटिक मौसम केंद्रों, डॉप्लर मौसम रडारों तथा सेटेलाइट-बेस्ड बारिश डेटासेट से मिली जानकारी को इकट्ठा किया जाता है।

मोबाइल एप्लिकेशन, एसएमएस अलर्ट, व्हाट्सएप, किसान पोर्टल, अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म और टेलीविजन जैसे अलग-अलग माध्यमों के उपयोग के अलावा सब्जियों और अन्य बाजारों में लगाए गए डिस्प्ले के माध्यम से भी स्थानीय मौसम पूर्वानुमान की जानकारी प्रसारित की जाएगी।

जितेंद्र सिंह ने क्या कहा?

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि ये उत्पाद पारंपरिक मौसम पूर्वानुमान से हटकर, प्रभाव-आधारित और निर्णय-सहायक पूर्वानुमान की ओर एक बड़ा बदलाव हैं; जो किसानों, प्रशासकों, आपदा प्रबंधकों और नागरिकों को सटीक, स्थान-विशेष और कार्रवाई योग्य जानकारी प्रदान करने में सक्षम हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को दो नई सेवाएं शुरू कीं। इनमें एक एआई-सक्षम मानसून अग्रिम पूर्वानुमान प्रणाली है, जो 16 राज्यों और 3,000 से अधिक उप-जिलों के किसानों की मदद के लिए मौसमी बारिश की प्रगति और स्थानीय मौसम की जानकारी चार सप्ताह पहले तक उपलब्ध कराएगी।

दूसरे प्रोडक्ट को एक पायलट सर्विस के तौर पर शुरू किया गया है, जो उत्तर प्रदेश के लिए हाई-रिजॉल्यूशन वाला स्थानीय बारिश का पूर्वानुमान लगाएगा। यह घने ऑब्जर्वेशनल नेटवर्क और एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 1 किमी. रिजॉल्यूशन पर 10 दिन पहले तक बारिश का ऑपरेशनल पूर्वानुमान तैयार कर सकता है।

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