पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि भारत में पिछले साल दवाईयों के लगभग 2315 सैंपल फेल हो गये। इतने अधिक सैंपल शायद पहली बार फेल हुए है। यह अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण बात है।
उन्होंने कहा कि जेनरिक दवाईयां बनाने में भारत विश्व में सबसे आगे है। हर वर्ष करोड़ों रुपये की दवाईयां निर्यात होती है। इस उद्योग में लाखों लोगों को रोजगार मिल रहे हैं। भारत में बनने वाली दवाईयों में 40 प्रतिशत दवाईयां हिमाचल प्रदेश में बनती है। समाज और सरकार को कोशिश करके इस उद्योग को और अधिक बढ़ाना चाहिए। इसके विपरित दुर्भाग्य की बात है कि दवाईयों में मिलावट करके, हिमाचल प्रदेश का नाम बदनाम किया जा रहा है। सरकार को इस संबंध में कठोर कार्यवाही करनी चाहिए।
शांता कुमार ने कहा कि यह देश का दुर्भाग्य है कि दवाईयों से लेकर मिठाईयों तक में चिंताजनक मिलावट हो रही है। भारत के सबसे बड़े मंदिर तिरुपति नाथ के प्रसाद में भी मिलावट के समाचार आये। भारत के मंदिरों में करोड़ों श्रद्धालु जाते है। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि भारत में भगवान के मंदिरों में मिलावट वाला प्रसाद होता है।
उन्होंने कहा कि देश में टिड्डीदल की तरह ही जनसंख्या बढ़ रही है और इसी अनुपात में भ्रष्टाचार भी बढ़ रहा है। इस बढ़ते भ्रष्टाचार को रोकने की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने सभी प्रदेशों की सरकारों से विशेष आग्रह किया है कि इस भ्रष्टाचार के जहर से कम से कम दवाईयों और मिठाईयों और मंदिरों के प्रसाद को मुक्त किया जाए। सरकार इस बात को गंभीरता से विचार करे और अपराधियों को कठोर सजा दें।


