गोरखपुर चिड़ियाघर में पेंटेड स्टार्क के दो चूजों का जन्म, चार साल की मेहनत रंग लाई

चिड़ियाघर में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम सफलता मिली है। यहां पेंटेड स्टार्क पक्षी के बाड़े में पहली बार दो चूजों का जन्म हुआ है। इस उपलब्धि से चिड़ियाघर प्रबंधन में उत्साह का माहौल है। चार वर्षों से प्रबंधन प्रयास कर रहा था, लेकिन ये पक्षी अपना घोषला नहीं बना रहे थे। दोनों चूजों पूरी तरह से स्वस्थ है, गतिविधियों पर प्रबंधन टीम निगरानी कर रही है।

वर्ष 2021 में लखनऊ चिड़ियाघर से पेंटेड स्टार्क के चार जोड़े गोरखपुर लाए गए थे। इन पक्षियों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण तैयार करने के प्रयास लगातार किए जा रहे थे, जिसका सकारात्मक परिणाम अब सफल प्रजनन के रूप में सामने आया है।

चिड़ियाघर के उप निदेशक डा. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि यह पहला मौका है जब यहां पेंटेड स्टार्क ने चूजों को जन्म दिया है। उन्होंने बताया कि यह सफलता चार वर्षों की सतत मेहनत का परिणाम है। पेंटेड स्टार्क सामान्यतः ऊंचे पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं, लेकिन चिड़ियाघर में ऐसे पेड़ों के अभाव में कृत्रिम व्यवस्था करनी पड़ी।

प्रबंधन ने बाड़े के अंदर ऊंचाई पर बांस के सहारे कृत्रिम स्थल की संरचना तैयार की, लेकिन शुरुआत में पक्षियों ने घोंसला नहीं बनाया। इसके बाद उनके प्राकृतिक व्यवहार का अध्ययन कर नीम, बबूल, तुलसी और इमली की टहनियां बाड़े में उपलब्ध कराई गईं।

इन टहनियों से पक्षियों ने घोंसला तैयार किया और चूजों को जन्म दिया। उप निदेशक ने बताया कि दोनों चूजे पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित रूप से भोजन कर रहे हैं। उनकी गतिविधियों पर विशेषज्ञों की टीम लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि उनके विकास में कोई बाधा न आए।

किसी के पास आने पर छीपा लेती है मां
डा. योगेश ने बताया कि पेंटेड स्टार्क संवेदनशील प्रजाति के पक्षी होते है। ये अपने चूजों के प्रति और ज्यादा संवेदनशील होते है। किसी को पास आता देख मां अपने चूजों को पंखों में छीपा लेती है। वहीं नर पक्षी पीछे से पास आने वालों की गतिविधियों पर नजर रखता है। जैसे ही उसे खतरा महसूस होता, बच्चों को बचाने के लिए आक्रामक भी हो जाता है।

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