बस्तर के अंतिम बड़े माओवादी व 25 लाख रुपये के इनामी कमांडर पापाराव ने बुधवार को औपचारिक रूप से समर्पण कर दिया। उसके 17 साथियों ने भी हथियार डाल दिए हैं। इनमें सात महिलाएं शामिल हैं।
पापाराव के साथ कुल 87 लाख रुपये के इनामी माओवादी मुख्यधारा में लौटे हैं। इनमें डिविजनल कमेटी सदस्य अनिल ताती और प्रकाश माड़वी जैसे शीर्ष माओवादी शामिल हैं। इनके समर्पण के बाद माना जा रहा है छत्तीसगढ़ में माओवादी नेतृत्व का अंत हो गया है।
जगदलपुर के शौर्य भवन में आयोजित समारोह में माओवादियों ने एडीजी नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद सिन्हा, बस्तर रेंज के आइजीपी सुंदरराज पी और सीआरपीएफ महानिदेशक जीपी सिंह के समक्ष समर्पण किया है। अपने हथियार छोड़ने के बाद उन्होंने संविधान की प्रति थामी।
इस दौरान बस्तर के जनजातीय समुदाय ने उनका गुलाब के फूलों से स्वागत किया। समर्पित माओवादियों ने 12 लाख रुपये, आठ एके-47, एक इंसास, एक एसएलआर और बीजीएल सहित कुल 18 स्वचालित हथियार सुरक्षा बल को सौंपे।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह समर्पण प्रदेश में माओवादी हिंसा के अंत की दिशा में निर्णायक पड़ाव है। उन्होंने बताया कि राज्य का अधिकांश क्षेत्र अब माओवादी प्रभाव से मुक्त हो चुका है और अब केवल छिटपुट माओवादी ही बचे हैं, जो लगातार समर्पण कर रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि 31 मार्च की तय समय-सीमा से पहले प्रदेश पूरी तरह माओवादी हिंसा से मुक्त हो जाएगा।
बता दें कि देश के बड़े माओवादी गणपति के नेपाल में भागने की खबर है। वहीं, उसका करीबी सहयोगी मिशिर झारखंड में छिपा बताया जा रहा है। साथ ही बस्तर में पापाराव के समर्पण के बाद केवल सोढ़ी केसा और डीवीसीएम हेमला विज्जा बचे हैं, जो प्रदेश के बाहर तेलंगाना के मुलगु जिले में छिपे हैं। दो-तीन छोटी टीमें अभी बची है, पर वे अब सक्रिय नहीं हैं।
सुरक्षा बल के दबाव के कारण समर्पण
पापाराव ने बताया कि माओवादी देवजी ने अंतिम मुलाकात में कहा था कि वे सभी मिलकर संघर्ष जारी रखेंगे। हालांकि, कुछ समय बाद देवजी ने तेलंगाना में चुपचाप हथियार डाल दिए। इस बीच सुरक्षा बल के लगातार बढ़ते दबाव ने उसे और उसकी टीम को समर्पण के लिए मजबूर कर दिया।


