भ्रष्टाचार से निपटने में संपत्ति रिकवरी महत्वपूर्ण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी: ईडी, सीबीआई

भ्रष्टाचार-रोधी वैश्विक सम्मेलन में ईडी निदेशक राहुल नवीन ने सोमवार को कहा कि संपत्ति की रिकवरी, कार्रवाई के बाद का विचार नहीं है, बल्कि यह कानून के क्रियान्वयन की सफलता का वास्तविक पैमाना है। इसी कार्यक्रम में सीबीआइ निदेशक प्रवीण सूद ने कहा कि आज भ्रष्टाचार अंतरराष्ट्रीय, परिष्कृत और तकनीकी होता जा रहा है।

राजधानी दिल्ली में 23-25 मार्च तक आयोजित जीएलओबीई (ग्लोब) नेटवर्क की 12वीं संचालन समिति की बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राहुल नवीन ने प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति का पता लगाने, उसकी रोकथाम, जब्ती और वापस दिलाने के एजेंसी के दायित्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीएसी) में निहित आधुनिक भ्रष्टाचार-रोधी ढांचे के तहत संपत्ति की रिकवरी कानून के क्रियान्वयन की सफलता का सबसे सच्चा पैमाना है।

इस मामले में भारत के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ईडी ने लगभग 5.6 अरब अमेरिकी डालर की संपत्ति वापस दिलाई है, जिसमें भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़ी संपत्ति भी शामिल है। इस संपत्ति का बड़ा हिस्सा हाल के वर्षों में वापस दिलाया गया है।

ईडी निदेशक ने भारत की दो एजेंसियों की पूरक भूमिकाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने सीबीआइ को भ्रष्टाचार-रोधी जांच और अभियोजन की प्राथमिक संस्था और ईडी को वित्तीय जांच व संपत्ति की रिकवरी पर केंद्रित एजेंसी बताया। अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने एक मामले में स्पेन द्वारा दी गई सहायता का उदाहरण दिया, जिसमें ग्लोब नेटवर्क के जरिये साझा की गई जानकारी के आधार पर औपचारिक चैनलों के जरिये संपत्ति को सीधे तौर पर जब्त किया जा सका।

उन्होंने जांच के शुरुआती चरणों में तेजी लाने के लिए ‘ओपन सोर्स रजिस्टि्रयों की निर्देशिका’ की उपयोगिता का भी जिक्र किया।

सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद ने कहा कि आधुनिक भ्रष्टाचार से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकल्प नहीं, बल्कि परम आवश्यकता है। उन्होंने ग्लोब नेटवर्क के ‘सुरक्षित संचार मंच’ (एससीपी) को सदस्य देशों के अधिकारियों के बीच इंक्रिप्टेड और रीयल टाइम में जानकारी के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत प्रभावी उपकरण बताया।

उन्होंने एजेंसियों से आग्रह किया कि वे कार्रवाई योग्य खुफिया जानकारी साझा करें और उपलब्ध सहयोगी तंत्रों का पूरा उपयोग करें। समन्वित प्रयासों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई यह सुनिश्चित कर सकती है कि अपराधियों को सजा मिले और अवैध संपत्ति बरामद हो।

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