नई दिल्ली: भारत को “उद्यमशील राज्य” बनाने के लिए ईमानदार अधिकारियों को निरर्थक और परेशान करने वाले अभियोजन से संरक्षण प्रदान करना अनिवार्य है। यह बात आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में कही गई है, जिसे गुरुवार को संसद में पेश किया गया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश इस सर्वेक्षण में कहा गया कि देश की आर्थिक और प्रशासनिक प्रणाली में ऐसे कानूनी और संस्थागत ढांचे होने चाहिए, जो सद्भावना में लिए गए निर्णयों को सुरक्षित रखें। इसके साथ ही, गलती और भ्रष्टाचार के बीच स्पष्ट अंतर तय करना भी आवश्यक है।
सर्वेक्षण में यह भी जोर दिया गया कि अगर ईमानदार अधिकारियों को बार-बार झूठे या निरर्थक अभियोजन का सामना करना पड़े, तो इसका प्रभाव न केवल सरकारी कार्यों की गति पर पड़ता है, बल्कि उद्यमशीलता और निर्णय लेने की क्षमता पर भी नकारात्मक असर होता है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, एक “उद्यमशील राज्य” में नीतियों और निर्णयों की स्पष्टता और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इससे केवल भ्रष्टाचार को ही रोकने में मदद नहीं मिलती, बल्कि सही और पारदर्शी प्रशासनिक निर्णय लेने के लिए भी प्रोत्साहन मिलता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा ढांचा अधिकारियों को जोखिम लेने और नवाचार के अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। सर्वेक्षण में यह भी सुझाव दिया गया कि नीति निर्माण और कानूनी प्रक्रिया में सुधार के जरिए अधिकारियों को अनावश्यक झंझटों और कानूनी बाधाओं से मुक्त किया जाना चाहिए।
सर्वेक्षण के इस हिस्से को आर्थिक और प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि ईमानदार अधिकारी बिना डर के अपने कर्तव्यों का पालन करें और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने वाले निर्णय लें।


