गुमला शहर के डीएसपी रोड निवासी कौशल्या देवी (76 वर्ष), पति स्व. कमासुख ओहदार (प्रख्यात अधिवक्ता), का सोमवार 23 मार्च 2026 को निधन हो गया। उनके निधन से परिवार और आसपास के लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। कौशल्या देवी का जीवन सादगी, संघर्ष और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा।
कौशल्या देवी को कोई पुत्र नहीं था, उनकी पांच बेटियां ही उनका सहारा थी। समाज में अक्सर यह धारणा देखने को मिलती है कि अंतिम संस्कार जैसे महत्वपूर्ण कर्तव्यों का निर्वहन केवल पुत्र ही करता है। लेकिन इस परिवार की बेटियों ने इस सोच को बदलते हुए समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।
मंगलवार को जब अंतिम यात्रा निकली, तो उनकी पांचों बेटियां नीलिमा ओहदार, विद्या ओहदार, ज्योति ओहदार, अर्चना ओहदार और अल्पना ओहदार ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। बड़ी बेटी नीलिमा ओहदार ने पूरे विधि-विधान के साथ मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्म पूरी की। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए भावुक करने वाला था।
गौरतलब है कि इससे पहले भी इन पांचों बेटियों ने अपने पिता स्व. कमासुख ओहदार के निधन पर भी अर्थी को कंधा दिया था और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई थी। बेटियों का यह साहसिक कदम समाज को एक मजबूत संदेश देता है कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं।
आज के बदलते दौर में यह घटना समाज के लिए एक आईना है, जो यह दिखाती है कि संतान का मूल्य लिंग से नहीं, बल्कि उनके संस्कार और जिम्मेदारी निभाने की क्षमता से तय होता है। बेटियों ने अपने कर्तव्य का निर्वहन कर न केवल अपने माता-पिता के प्रति सच्ची श्रद्धा दिखाई, बल्कि समाज को नई सोच अपनाने की प्रेरणा भी दी।
अंतिम संस्कार में समाजसेवी अशोक त्रिपाठी पूरे समय अंतिम संस्कार में मौजूद रहे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह घटना समाज के लिए एक बड़ा संदेश है। इससे स्पष्ट होता है कि बेटियां ही परिवार का सर्वस्व होती हैं। वे हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं और आज उन्होंने बेटे का फर्ज निभाकर समाज को नई दिशा दिखाई है।


