एक नायाब और मजबूत पहल में 2030 तक भारत को बाल विवाह से मुक्त करने की रणनीति तय करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के कांस्टीट्यूशन क्लब में एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से ज्यादा सांसद एक साथ जुटे।
बाल विवाह और सोशल मीडिया से जुड़े खतरों को बच्चों के लिए बड़ी चुनौती करार देते हुए सांसदों ने इन मुद्दों को आगे लाने के लिए शून्य काल का इस्तेमाल, निजी विधेयक लाए जाएं और अपने संसदीय क्षेत्रों में इसे मजबूती से उठाया जाए।
‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ की शुरुआत 17 नवंबर 2024 को हुई थी और बाल विवाह एवं बाल यौन शोषण पर चिंता जताते हुए 38 सांसदों ने इसका समर्थन किया। इसे ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का समर्थन प्राप्त है, जो बाल अधिकारों के संरक्षण का देश का नागरिक समाज संगठनों का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसके 250 से ज्यादा सहयोगी संगठन देश के 450 से अधिक जिलों में काम कर रहे हैं।
‘डायलॉग विद पार्लियामेंटेरियंस ऑन अचीविंग चाइल्ड फुल पोटेंशियल’ में बोलते हुए तेलुगु देशम पार्टी के नेता और ‘एमपी’ज फ़र चिल्ड्रेन’ के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, “बाल विवाह किसी एक पार्टी या धर्म का मुद्दा नहीं है। इसे खत्म करने पर सभी दलों में आम सहमति है।
भारत ने दिखाया है कि जब भी हम सामूहिक संकल्प के साथ काम करते हैं, हमने नतीजे हासिल किए हैं। हमने पोलियो खत्म किया, बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। कोई वजह नहीं कि उसी संकल्प के साथ हम 2030 तक बाल विवाह का खात्मा नहीं कर पाएं।”
तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता देवरायलु ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र के आधार पर रोक लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया। बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए इस विधेयक में सख्त सजा, विशेष बाल विवाह निषेध अधिकारी, विशेष अदालतें और एक डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल का प्रावधान है।


