हुसैनीवाला के अलावा फिरोजपुर के साथ बलिदानी भगत सिंह व उनके साथियों की एक और याद जुड़ी है। शहर के तूड़ी बाजार में स्थित बलिदानियों के गुप्त ठिकाने पर ही भगत सिंह की ओर से अपनी वेशभूषा बदली गई थी और यहीं से कई इंकलाबी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता था, लेकिन आजादी के 79 साल बाद भी बलिदानियों की धरोहर के संरक्षण के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे।
साल 2023 में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस इमारत का दौरा कर इसके संरक्षण की बात कहीं थी। उन्होंने दावा किया था कि भगत सिंह की याद को जीवित रखने के लिए यह इमारत एक अच्छा उदाहरण है। इसके अलावा साल 2014 में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे महरूम कमल शर्मा ने भी पूर्व डीसी डीपीएस खरबंदा के साथ इस इमारत का दौरा किया था।
प्रशासन ने इस इमारत से जुड़े लोगों पर आधारित कमेटी बनाकर बाकायदा अपनी रिपोर्ट तैयार कर पंजाब सरकार को भेजी थी, जिसके बाद पंजाब सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा नवंबर 2014 में इस इमारत को दिसंबर 2014 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने संबंधी प्राथमिक नोटीफिकेशन जारी किया था। ईमारत को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की प्रकिया में दो माह का समय दे एतराज एवं दावे मांगे गए थे।
पुरातत्व विभाग की कार्यवाही के दौरान ईमारत के कितने दावेदार आए या कितने एतराज आए। इस संबंधी अध्ययनकर्ता राकेश कुमार द्वारा मांगी गई आरटीआइ में पता चला कि एक भी एतराज अथवा दावा पेश नहीं हुआ। बावजूद इसके इमारत को राष्ट्रीय धरोहर घोषित नहीं किया गया। फिरोजपुर को शहीदों की धरती होने का गर्व प्राप्त है क्योंकि इसी धरती पर सतलुज दरिया में बलिदानियों की अस्थियां प्रवाहित की गईं थीं और यहीं पर उनका शहीदी स्मारक शांति स्थल के नाम से स्थापित है।
आजादी से लेकर अब तक हर वर्ष 23 मार्च को यहां शहीदों की याद में मेले लगते आ रहे हैं। हर बार केंद्रीय, प्रादेशिक राजनेताओं के अलावा शहीदों की सोच पर पहरा देने का दावा करने वाली कई राजनीतिक पार्टियों के नेता, संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता कई दावे करते आ रहे हैं।
अध्ययनकर्ता राकेश कुमार ने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, डॉ. गया प्रसाद, शिव वर्मा, विजय कुमार सिन्हा, महावीर सिंह, सुखदेव, जय गोपाल के 10 अगस्त 1928 से लेकर चार फरवरी 1929 तक तूड़ी बाजार स्थित इस इमारत में रहने, यहां से इंकलाबी गतीविधियों को अंजाम देने और शहीद-ए-आजम भगत सिंह की वेशभूषा इसी इमारत में बदले जाने का दावा किया था। उनके अध्ययन की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने एक्शन लेते हुए पांच अक्टूबर 2014 को इस इमारत का दौरा किया था।
शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव मेमोरियल सोसायटी के अध्यक्ष वरिंद्र सिंह वैरड़ ने कहा कि सरकार को इस इमारत को जल्द धरोहर में तबदील करना चाहिए, ताकि बलिदानियों की सोच को जीवित रखा जा सके।
नौजवान भारत सभा के महासचिव मंगा सिंह आजाद ने बताया कि उनके द्वारा लंबे समय से तूड़ी बाजार स्थित गुप्त ठिकाने को धरोहर बनाने के लिए संघर्ष किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से एक दशक पहले इसे धरोहर बनाने का वादा किया था, लेकिन अपने वादे पर खरा नहीं उतर पा रही है।


