अब मरीज खुद देंगे इलाज का फीडबैक, जीएमसीएच सेक्टर-32 में पेशेंट फीडबैक सिस्टम लागू

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अस्पताल में इलाज के दौरान मरीजों को कितनी देर तक इंतजार करना पड़ा, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार कैसा रहा और अस्पताल की सुविधाएं कितनी संतोषजनक थीं—अब इन सभी सवालों के जवाब सीधे मरीजों से लिए जाएंगे। मरीजों को इलाज के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े और स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार किया जा सके, इसके उद्देश्य से जीएमसीएच सेक्टर-32 ने पेशेंट फीडबैक सिस्टम लागू कर दिया है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब मरीज और उनके परिजन अस्पताल में इलाज के अपने अनुभव को सीधे साझा कर सकेंगे। इसके लिए अस्पताल प्रशासन ने एक ऑनलाइन फीडबैक सिस्टम शुरू किया है, जिसके माध्यम से मरीज अपने इलाज से जुड़ी समस्याओं, सुझावों और संतुष्टि स्तर को दर्ज कर सकेंगे। अस्पताल का मानना है कि इससे सेवाओं की गुणवत्ता का वास्तविक आकलन हो सकेगा और कमियों को समय रहते दूर किया जा सकेगा।

पेशेंट फीडबैक सिस्टम को उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है, ताकि अधिक से अधिक मरीज इसका लाभ उठा सकें। यह फीडबैक फॉर्म जीएमसीएच की आधिकारिक वेबसाइट gmch.gov.in पर उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, अस्पताल परिसर के विभिन्न ब्लॉकों में क्यूआर कोड भी लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर मरीज या उनके तीमारदार आसानी से फीडबैक फॉर्म तक पहुंच सकते हैं।

फीडबैक फॉर्म के माध्यम से मरीज इलाज के दौरान इंतजार की अवधि, डॉक्टरों की उपलब्धता, स्टाफ के व्यवहार, सफाई व्यवस्था, दवाओं की उपलब्धता और अन्य सुविधाओं को लेकर अपनी राय दर्ज कर सकेंगे। साथ ही, यदि किसी मरीज को इलाज के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या समस्या का सामना करना पड़ा है, तो वह उसे भी विस्तार से लिख सकता है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों से मिलने वाला फीडबैक पूरी तरह गोपनीय रखा जाएगा और इसका उपयोग केवल सेवाओं में सुधार के लिए किया जाएगा। प्राप्त सुझावों और शिकायतों की नियमित समीक्षा की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों को निर्देश दिए जा सकें। इससे अस्पताल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और मरीजों का भरोसा भी मजबूत होगा।

जीएमसीएच सेक्टर-32 का मानना है कि मरीजों की राय किसी भी स्वास्थ्य संस्थान के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। सीधे मरीजों से मिलने वाला फीडबैक न केवल व्यवस्थागत कमियों को उजागर करेगा, बल्कि डॉक्टरों और स्टाफ को भी बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रेरित करेगा। अस्पताल प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से मरीजों को इलाज के दौरान होने वाली परेशानियों में कमी आएगी और कुल मिलाकर स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और बेहतर होगा।

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