रामजन्मभूमि परिसर के पूरक मंदिरों व सप्तर्षि मंदिरों में दर्शन अब शीघ्र ही आरंभ किया जा सकता है। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नवसंवत्सर समारोह में आमंत्रित अतिथियों को इनमें दर्शन करा कर इसका परीक्षण कर लिया है और प्रतिदिन के दर्शनार्थियों की संख्या का भी प्रारंभिक आकलन हो गया है। अब चैत्र रामनवमी के बाद किसी भी दिन दर्शन आरंभ किया जा सकता है।
इस पर अंतिम निर्णय भी शनिवार को होने जा रही तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक में हो जाने की संभावना है। इन मंदिरों में पास के माध्यम से ही श्रद्धालुओं को दर्शन कराया जाएगा। शुरुआती दिनों में प्रतिदिन पांच-छह हजार श्रद्धालुओं को ही अनुमति दी जाएगी।
राम मंदिर व सभी पूरक मंदिरों का निर्माण पूर्ण हो जाने पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गत वर्ष 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों धर्म ध्वजा का आरोहण कराया था। तभी माना गया था कि पूरक मंदिरों में भी दर्शन शुरू किया जाएगा, परंतु छह पूरक मंदिरों का निर्माण रामजन्मभूमि परिसर के परकोटे के भीतर ही होने से इसमें अड़चन आ गई।
कारण यह था कि तत्समय परकोटे का संपूर्ण निर्माण नहीं हो पाया था और इन मंदिरों में भी फिनिशिंग व साफ-सफाई का कार्य अधूरा था। अब जबकि परकोटे का निर्माण हो गया और राम मंदिर के द्वितीय तल पर वर्ष प्रतिपदा के दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीरामयंत्र व रामनाम की भी स्थापना कर दी तो सभी सात पूरक मंदिरों व सप्तर्षि मंदिरों में दर्शन शुरू किए जाने को लेकर ट्रस्ट पर दबाव बढ़ गया है।
राष्ट्रपति की उपस्थिति में आयोजित हुए नवसंवत्सर समारोह में आमंत्रित अतिथियों को राम मंदिर के साथ कुछ पूरक मंदिरों व सप्तर्षि मंदिरों का भी दर्शन कराया गया।
सूत्रों का कहना है कि इस दौरान ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं की संख्या और सुरक्षा व्यवस्था का प्रारंभिक आकलन कर लिया गया है। अब रामनवमी के बाद दर्शन शुरू किया जा सकता है। रामनवमी पर श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होने के कारण उस दिन ऐसा नहीं किया जाएगा, परंतु इसके बाद दर्शन शुरू करने की योजना है।
तिथि के संबंध में ट्रस्टियों की शनिवार को प्रस्तावित बैठक में विमर्श किया जाएगा। यह बैठक मणिरामदास जी की छावनी में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महांत नृत्पगोपालदास की अध्यक्षता में होगी।


