झारखंड में ‘टाइगर’ की दहाड़ से बैकफुट पर भाजपा, अकेले विधायक ने पेश किए 7 कटौती प्रस्ताव

झारखंड विधानसभा के हालिया बजट सत्र में एक दिलचस्प राजनीतिक परिदृश्य उभरकर सामने आया, जहां संख्या बल में अकेला लेकिन सक्रियता में आगे रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के इकलौते विधायक टाइगर जयराम कुमार महतो ने मुख्य विपक्षी दल भाजपा को सदन में पीछे छोड़ दिया।

सात कटौती प्रस्ताव पेश कर उन्होंने न सिर्फ सरकार को घेरा, बल्कि भाजपा की निष्क्रियता को भी उजागर कर दिया।

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विभिन्न विभागों के बजट पर चर्चा के बीच जयराम महतो ने सात कटौती प्रस्ताव पेश किए। इनमें से छह प्रस्तावों पर उन्हें सदन में विस्तार से बोलने का अवसर भी मिला।

नियमों के तहत प्रत्येक कटौती प्रस्ताव पर लगभग 15 मिनट बोलने का समय मिलता है, जिसका उन्होंने पूरी तैयारी और आक्रामकता के साथ उपयोग किया। इस दौरान उन्होंने सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, साथ ही विपक्ष की भूमिका पर भी टिप्पणी की।

जयराम महतो की यह सक्रियता इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि वे सदन में अकेले विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 21 विधायकों का मजबूत दल मौजूद है। इसके बावजूद भाजपा के विधायक कटौती प्रस्ताव लाने और बहस में प्रभावी भागीदारी दिखाने में पीछे रह गए। इसे भाजपा की रणनीतिक चूक के रूप में देखा जा रहा है।

इस स्थिति को लेकर भाजपा के अंदर भी असंतोष उभरा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विधायकों की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई और उन्हें सदन में अधिक आक्रामक और सक्रिय भूमिका निभाने की नसीहत दी। यह फटकार इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व विधानसभा के भीतर अपनी उपस्थिति और प्रभाव को लेकर गंभीर है।

उल्लेखनीय है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर भी भाजपा की ओर से कोई संशोधन प्रस्ताव नहीं लाया गया, जबकि संसदीय परंपरा के अनुसार विपक्षी दल आमतौर पर सरकार को घेरने के लिए इस अवसर का उपयोग करते हैं। इस चूक ने भी भाजपा की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

पक्ष के साथ विपक्ष भी निशाने पर

जयराम महतो ने अपने भाषणों में सरकार की नीतियों के साथ-साथ भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने सदन में विपक्ष की चुप्पी को मुद्दा बनाते हुए कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरूरी है, लेकिन यहां विपक्ष अपनी भूमिका निभाने में विफल नजर आ रहा है।

यह घटनाक्रम झारखंड की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत देता है। एक ओर जहां छोटी पार्टियों या एकल विधायकों की सक्रियता उन्हें चर्चा में ला रही है, वहीं बड़े दलों के लिए यह चेतावनी है कि केवल संख्या बल पर्याप्त नहीं, बल्कि सदन के भीतर प्रभावी उपस्थिति भी जरूरी है।

इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा में आवाज उठाने और मुद्दों को धार देने की क्षमता ही असली राजनीतिक ताकत है। टाइगर जयराम महतो की सक्रियता ने जहां उन्हें केंद्र में ला दिया, वहीं भाजपा के लिए यह आत्ममंथन का विषय बन गया है।

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