जीवन भर की पूंजी लगाकर कोई सपंत्ति खरीदने के लिए बैनामा कराने जाने वाले लोगों को उप निबंधक कार्यालयों पर असुविधा का सामना करना पड़ता है। यहां नंबर आने के इंतजार में घंटों खड़ा रहता पड़ता है। कचहरी परिसर में यह इंतजार खुले आसमान के नीचे धूप में खड़े होकर अथवा टीन शेड के नीचे पंखे की गर्म हवा में करना होता है।
महिलाओं और वृद्धजनों को यहां अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार को कई कई लाख रुपये का स्टांप और निबंधन शुल्क अदा करने वाले लोगों के लिए पेयजल, शौचालय व अन्य आधारभूत सुविधाएं भी यहां नहीं हैं।
जनपद में छह उपनिबंधक कार्यालय हैं। जिनमें दो मवाना और सरधना तहसील मुख्यालय पर और चार मेरठ शहर क्षेत्र के लिए हैं। जनपद में रोजाना 300 से 400 के बीच बैनामे होते हैं। इनके लिए एक हजार से ज्यादा लोगों को रजिस्ट्री कार्यालय पर आना होता है। शहर में दो उप निबंधकों के कार्यालय कलक्ट्रेट परिसर में हैं जबकि दो उपनिबंधक कार्यालय एमडीए भवन में किराये पर संचालित होते हैं। चारों कार्यालयों में जनसुविधाओं का अभाव है।ऐसा लगता है जैसे चौपाल पर बैठकर करा रहे हों बैनामा
कचहरी परिसर में संचालित दोनों रजिस्ट्री कार्यालयों में सुबह से ही लोगों की बड़ी भीड़ उमड़ती है। लेकिन उनके बैठने के लिए यहां पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। बैठने की कुर्सियां टीन शेड के नीचे लगी हैं। जिनमें धूप आती है। गर्मी से बचने के लिए टीन शेड में पंखे लगाए गए हैं जो कि गर्म हवा देते हैं।
रजिस्ट्री कराने के लिए लोगों को कई घंटे प्रतीक्षा करनी होती है। एमडीए बिल्डिंग में भी दोनों उप निबंधक कार्यालयों में आने वाली भीड़ के सामने बैठने की व्यवस्थाएं नाकाफी हैं। लोगों को कार्यालय के भीतर स्थान न मिलने पर बाहर गैलरी में खड़े होकर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह इंतजार महिलाओं और वृद्धजन को भारी पड़ता है।
कचहरी परिसर में रजिस्ट्री कराने के लिए बिक्रीकर्ता, खरीदार और गवाहों को खुले आसमान के नीचे टूटी कुर्सी पर बैठाकर फोटो और बायोमैट्रिक की कार्रवाई कराई जाती है। यहां बैठकर ऐसा लगता है जैसे चौराहे और चौपाल पर बैठकर रजिस्ट्री की कार्रवाई की जा रही हो। यहां पीने के पानी और शौचालय के लिए भी लोग परेशान घूमते हैं।


