‘अनुभवी नेताओं की कमेटी बनाकर फिजूलखर्ची रोकें’ शांता कुमार की सुक्खू सरकार को सलाह, …राजनीति के लिए न लें निर्णय

 पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा कि आर्थिक कठिनाई में सिसकती हिमाचल सरकार ने कुछ नेताओं का केबिनेट रैंक वापस लिया है। हिमाचल प्रदेश में सरकारी खर्चों में बचत सबसे जरूरी है, परन्तु यह केवल समय की राजनीतिक चाल नहीं होनी चाहिए। क्या, सरकार का यह कदम केवल छह माह के लिए है। इसके बाद प्रदेश का आर्थिक संकट समाप्त हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि हिमाचल सरकार करोड़ों रुपये के ऋण के नीचे दबी है। सबसे बड़ा कारण यह है कि सरकार खर्च बढ़ाती गई और साधन बढ़ाने की कोशिश नहीं की। सरकार ने बचत करने का इतना महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, इसकी प्रशंसा करने की इच्छा होती है, परन्तु जब यह पढ़ा कि यह निर्णय केवल छह माह के लिए है, तो मुझे विश्वास हो गया कि यह निर्णय बचत के लिए नहीं, केवल कुछ समय के लिए राजनीति करने का है।

एक-एक पैसा जोड़कर करोड़ों बचाए

शांता कुमार ने कहा कि सरकार एक बहुत बड़ी संस्था है। समुंद्र की तरह एक एक बूंद बचाने से समुद्र भरता है और एक-एक बूंद लौटाने से खाली होता है। मैंने स्वयं यह सब कुछ करके देखा है। छोटे से हिमाचल में विकास के लिए अधिक धन की आवश्यकता थी। मैंने एक एक पैसा बचाया, करोड़ों रुपये की बचत हुई और हिमाचल में शानदार विकास किया गया।

सरकार से किया आग्रह

उन्होंने हिमाचल सरकार से विशेष आग्रह किया है कि अनुभवी नेताओं की एक कमेटी बनाकर, सभी प्रकार के खर्चों में बचत करने का निर्णय करे। प्रदेश में कुछ साधन भी बढ़ाए जा सकते है। खर्चों में कमी की जाए और साधन बढ़ाए जाए।

पानी पर रायल्टी भी बढ़नी चाहिए

शांता कुमार ने कहा कि मैंने पहले भी कहा था कि हिमाचल प्रदेश की पन बिजली परियोजनाओं में मैंने रायल्टी का सिद्धांत बनाया था, उसे कई वर्ष हो गए। इस बीच बिजली का मूल्य बहुत बढ़ गया। यदि बिजली का मूल्य बढ़ता है, तो उसे बनाने वाले साधन पानी की रायल्टी भी बढ़नी चाहिए। हिमाचल सरकार भारत सरकार से इस प्रश्न पर संघर्ष करे और रायल्टी को भी बढ़ाया जाए।

शानन बिजली परियोजना पर संघर्ष की आवश्यकता

उन्होंने कहा कि जोगिंद्रनगर के शानन बिजली परियोजना को भी लेने के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता है। हिमाचल के पानी से हिमाचल प्रदेश में बिजली बनती है, परंतु शानन विद्युत परियोजना पर अधिकार, पंजाब का है। यह बहुत बड़ा अन्याय है।

शांता कुमार ने कहा कि पंजाब पुर्नगठन कानून में साफ लिखा था कि नए प्रदेश बनने पर साझे पंजाब की, जो सम्पत्ति जिस प्रदेश में होगी, उस पर उसी की मलकीयत होगी। लोकसभा के उस कानून के मुताबिक जोगिंद्रनगर शानन बिजली परियोजना, बहुत पहले हिमाचल प्रदेश को मिल जानी चाहिए थी।

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