राज्य में ट्रामा केयर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा खाका तैयार किया गया है। पांच साल पुराने सभी कालेजों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोला जाएगा।
सभी 18 मंडलों में अत्याधुनिक लेवल-एक ट्रामा बनेगा। इसके तहत हाईवे भी चिन्हित किए जाएं। जहां दुर्घटनाओं की अधिक आशंका रहती है। ये बातें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कही।
वह मंगलवार को केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेयी सांइटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ट्रामा एंड इमरजेंसी केयर रोडमैप फार ट्रामा एंड इमरजेंसी नेटवर्क विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
ट्रामा सेंटर व इमरजेंसी के लिए बढ़ेंगे पांच हजार बेड
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी अस्पतालों के एमबीबीएस डाक्टरों को ट्रामा केयर में दक्ष बनाने के लिए छह माह का विशेष प्रशिक्षण देने की जरूरत है। इसकी योजना बनाने का निर्देश दिया गया है।
इस प्रशिक्षण को डिप्लोमा या सर्टिफिकेट के रूप में मान्यता देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि डाक्टरों की विशेषज्ञता को औपचारिक पहचान मिल सके। ट्रामा के क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ ही इन डाक्टरों को प्रशिक्षित करेंगे।
ट्रामा के लिए अलग से नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को भी नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए। केजीएमयू ट्रामा सेंटर के प्रभारी प्रो. प्रेमराज सिंह ने बताया कि अगले पांच वर्ष का रोडमैप तैयार किया गया है, जिसके तहत प्रदेश में ट्रामा और इमरजेंसी सेवाओं के लिए लगभग 5000 अतिरिक्त बेड विकसित किए जाएंगे।
इसमें आइसीयू और वेंटिलेटर बेड भी होंगे, जिससे दुर्घटनाओं और गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल सके। उन्होंने कहा, सड़क हादसों में कमी लाने के लिए यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने की जरूरत है।
वहीं, नीति आयोग के सदस्य डा. वीके पाल ने कहा कि मोटरसाइकिल के पीछे बैठने वाले के लिए भी हेलमेट अनिवार्य हो और जो इसका पालन न करे कार्रवाई सुनिश्चित हो। नियमों में किसी भी प्रकार की ढील न दी जाए।


