प्रदेश में ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पुलिस महानिदेशक के आदेश पर जिलों में तैनात पुलिसकर्मियों को एक वर्ष के लिए राजकीय रेल पुलिस (जीआरपी) में तैनात किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत प्रदेश के 74 जिलों के रेलवे स्टेशनों पर कुल 2745 पुलिसकर्मी जल्द ही ड्यूटी संभालेंगे। इस फैसले से लंबे समय से मैनपावर की कमी से जूझ रही जीआरपी को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि नागरिक पुलिस से तीन वर्ष की प्रतिनियुक्ति पर जीआरपी में पुलिसकर्मियों को भेजने की पहले से चल रही व्यवस्था भी पूर्ववत जारी रहेगी।प्रदेश के 75 जिलों में से श्रावस्ती जिले में रेल लाइन नहीं होने के कारण वहां से पुलिसकर्मी नहीं भेजे जाएंगे।
74 जिलों से फोर्स आवंटित
शेष 74 जिलों से रेलवे स्टेशनों के लिए फोर्स आवंटित की गई है। संबंधित जिलों के पुलिस प्रमुख यह तय करेंगे कि किन पुलिसकर्मियों को जीआरपी में भेजा जाएगा।
फोर्स आवंटन के लिए प्रदेश के जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में सात पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर हैं।
दूसरी श्रेणी में प्रदेश के 15 मंडल अयोध्या, बरेली, गोरखपुर, झांसी, मुरादाबाद, सहारनपुर, गोंडा, अलीगढ़, मीरजापुर, मेरठ, आजमगढ़, बस्ती और चित्रकूट शामिल हैं। तीसरी श्रेणी में श्रावस्ती को छोड़कर वह 52 जिले, जहां से रेलवे लाइन गुजरती है।
वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने बताया कि जीआरपी भी नागरिक पुलिस का ही हिस्सा है। एक वर्ष के लिए पुलिसकर्मियों को जीआरपी में भेजने का आदेश मिला है। इसके लिए इच्छुक पुलिसकर्मियों से आवेदन मांगे जाएंगे और उन्हें अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी कर जीआरपी में तैनात किया जाएगा।


