सरकारी स्कूलों में संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर शिक्षा विभाग की एक अजीब योजना सामने आई है। विभाग ने प्राथमिक, मध्य तथा उच्च विद्यालयों में हारमोनियम, नाल, कैसियो, बांसुरी और झांझ जैसे वाद्य यंत्र तो भेज दिए, लेकिन इन्हें बजाना सिखाने के लिए प्राथमिक तथा मध्य विद्यालयों में एक भी संगीत शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई।
यह अलग बात है कि शिवसखी दुबे प्लस टू बालिका उच्च विद्यालय में तीन तीन संगीत शिक्षक है। बिहिया प्रखंड में प्राथमिक और मध्य विद्यालयों की संख्या 103 है। ऐसे में योजना की उपयोगिता और सरकारी पैसे के इस्तेमाल पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
पिछले महीने भेजी गई वाद्य यंत्रों की किट
जानकारी के अनुसार, पिछले महीने विभाग की ओर से संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्कूलों में वाद्य यंत्रों की किट भेजी गई थी। लेकिन स्कूलों में संगीत शिक्षक नहीं होने के कारण इन उपकरणों का सही उपयोग नहीं हो पा रहा है। कई जगहों पर बच्चे उत्सुकता में इन्हें यूं ही बजाने की कोशिश करते हैं, जबकि अधिकांश स्कूलों में इन्हें अलमारी और स्टोर रूम में रख दिया गया है।
शिक्षकों का कहना है कि बिना प्रशिक्षित शिक्षक के केवल वाद्य यंत्र भेज देना योजना की गंभीरता पर ही सवाल खड़ा करता है। पहले से ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में संगीत की अलग कक्षा चलाना फिलहाल संभव नहीं दिख रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत बच्चों के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसके लिए प्रशिक्षित शिक्षक और व्यवस्थित प्रशिक्षण जरूरी है। केवल उपकरण उपलब्ध करा देने से योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
विवरण स्थिति
- कुल प्रभावित स्कूल: 103 (प्राथमिक व मध्य विद्यालय)
- उपलब्ध कराए गए वाद्य यंत्र: हारमोनियम, नाल, कैसियो, बांसुरी, झांझ आदि
- मुख्य समस्या: संगीत शिक्षक की नियुक्ति नहीं
- वर्तमान स्थिति: कई स्कूलों में उपकरणों का उपयोग नहीं, कहीं यूं ही बजा रहे बच्चे


