सोमवार को लोकसभा में बजट सत्र के दूसरे चरण में पहली बार बिना किसी रुकावट के प्रश्नकाल हुआ। इस सत्र में विपक्षी सदस्यों द्वारा बार-बार विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहे थे।
जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई कुछ विपक्षी सदस्यों ने तुरंत अपनी चिंताओं को उठाने की मांग की। हालांकि, स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि वह उन्हें प्रश्नकाल के बाद, दोपहर 12 बजे बोलने की अनुमति देंगे।
राज्यसभा में जोरदार हंगामा
वहीं, निचले सदन में पश्चिम एशिया संकट पर बहस की विपक्ष की मांग को लेकर नारेबाजी और बार-बार रुकावटें देखने को मिली हैं। विपक्ष एलपीजी की मौजूदा स्थिति को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले हफ्ते के दौरान विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के कारण सदन सुबह 11 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच ‘प्रश्नकाल’ पूरा नहीं कर पाया है।
दो दिन की बहस के बाद गिरा ओम बिरला के खिलाफ प्रस्ताव
ओम बिरला को स्पीकर पद से हटाने की मांग वाला विपक्ष का प्रस्ताव दो दिन की बहस के बाद 10 मार्च को सदन में गिर गया। उन पर सत्ता पक्ष के प्रति पक्षपात करने और विपक्ष की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया था।
बिरला ने रविवार को सदन के अंदर कुछ सांसदों द्वारा बैनर, तख्तियां, पोस्टर दिखाने और कुछ खास तरह की भाषा के इस्तेमाल पर गहरी चिंता जताई थी और सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से आग्रह किया था कि वे अपने सदस्यों के बीच अनुशासन और उच्च नैतिक आचरण सुनिश्चित करें।
चिट्ठी में ओम बिरला ने क्या कहा?
सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं को लिखे एक पत्र में बिरला ने कहा कि सदन की हमेशा से ही गरिमापूर्ण चर्चा और संवाद की एक गौरवशाली परंपरा रही है, लेकिन कुछ समय से कुछ सदस्यों द्वारा सदन के भीतर और बाहर तथा संसद परिसर के अंदर भी देश के संसदीय लोकतंत्र की गरिमा और प्रतिष्ठा को कमजोर किया जा रहा है।


