धमाकों से कांपते हॉस्टल, दहशत और महंगे हवाई टिकट; ईरान से लौटे 70 भारतीय छात्रों के अनिश्चित भविष्य की कहानी

 ईरान में चल रहे संघर्ष के बीच करीब 70 भारतीय छात्र रविवार को सुरक्षित नई दिल्ली पहुंच गए। इनमें अधिकतर छात्र जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं, जो वहां मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे।

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर जब ये छात्र पहुंचे तो उनके चेहरों पर राहत साफ दिखाई दे रही थी। पिछले कई हफ्तों से भय और अनिश्चितता के माहौल में रह रहे इन छात्रों के लिए भारत लौटना किसी राहत से कम नहीं था।

युद्ध के बीच बंद हो गई पढ़ाई

ईरान में संघर्ष शुरू होने के समय वहां करीब 1200 कश्मीरी छात्र मौजूद थे, जिनमें अधिकांश मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। संघर्ष बढ़ने के साथ ही विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और अस्पतालों में शैक्षणिक गतिविधियां अचानक रुक गईं।

छात्रों के अनुसार ऐसी स्थिति में शैक्षणिक संस्थान और अस्पताल अक्सर पहले निशाने पर आते हैं, इसलिए वहां का माहौल बेहद असुरक्षित हो गया था।

धमाकों से कांप उठता था हॉस्टल

अनंतनाग की मेडिकल छात्रा ने बताया कि पिछले एक महीने का समय बेहद तनाव भरा रहा। उन्होंने बताया कि उनके हॉस्टल के पास पुलिस स्टेशनों पर बम गिरने से तेज धमाके होते थे और पूरा कमरा हिलने लगता था। ऐसे हालात में पढ़ाई जारी रखना संभव नहीं रह गया था और सभी छात्र भय के माहौल में जी रहे थे।

महंगे टिकट लेकर लौटे छात्र

छात्रों ने बताया कि भारत लौटने के लिए उन्हें खुद ही टिकट खरीदने पड़े। सामान्य तौर पर जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा के रहने वाले छात्र को आने-जाने का टिकट करीब 25 हजार रुपये में मिल जाता था, लेकिन इस बार आपात स्थिति में उन्हें दिल्ली आने के लिए एकतरफा टिकट पर ही करीब 55 हजार रुपये खर्च करने पड़े।

चार दिन के कठिन सफर के बाद पहुंचे दिल्ली

छात्रों को पहले ईरान से आर्मेनिया ले जाया गया। वहां से उन्हें दुबई पहुंचाया गया और फिर दिल्ली के लिए उड़ान भरवाई गई। लगातार यात्रा और कठिन परिस्थितियों के कारण कई छात्रों ने बताया कि उन्हें चार दिनों से ठीक से भोजन तक नहीं मिल पाया था।

इंटरनेट बंद होने से परिवारों की बढ़ी चिंता

ईरान में इंटरनेट सेवाएं बार-बार बाधित हो रही थीं, जिससे छात्रों का अपने परिवारों से संपर्क बनाए रखना मुश्किल हो गया था। कई छात्रों ने बताया कि वे अपने परिवारों को पूरी स्थिति बताने से भी हिचक रहे थे, क्योंकि वे उन्हें और ज्यादा चिंतित नहीं करना चाहते थे।

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