PM नरेन्‍द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हुनर और हौसले से आत्मनिर्भरता की कहानी ल‍िख रही हैं महिलाएं

 हरसोस गांव की सुनीता कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं। आज वही सुनीता दोना-पत्तल बनाकर न सिर्फ अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि परिवार की आय में भी हाथ बटा रही हैं। इसी तरह बबिता पांडेय ने प्रशिक्षण लेने के बाद जूट बैग बनाना शुरू किया और कम लागत में बेहतर आमदनी अर्जित कर रही हैं।

जनपद में सक्षम योजना के तहत महिलाओं को सशक्त बनाने की प्रक्रिया अब जमीनी स्तर पर असर दिखाने लगी है। वर्ष 2025 में बनारस में करीब 250 महिला-पुरुषों को प्रशिक्षित किया गया था, जबकि 2026 में 400 लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।घर की चौखट से बाहर निकली महिलाएं बनीं प्रेरणाश्रोत
जनपद में बड़ी संख्या में महिलाएं अब जीडीपी सहयोग करने के लिए आगे बढ़ रही हैं। जो महिलाएं पहले घर से छोटे स्तर पर नाश्ता बनाकर महीने में करीब 4,000-5,000 रुपये कमाती थी, सक्षम योजना से जुड़ने के बाद उसने फूड स्टाल शुरू कर रही हैं।

प्रशिक्षण और लोन की मदद से अपना काम बढ़ा रही हैं और यूपीआइ पेमेंट अपना रही हैं। महिलाएं बताती हैं कि एक साल के भीतर उसकी मासिक आय बढ़कर 12,000-15,000 रुपये तक पहुंच गई। इस तरह साल भर में उसकी आमदनी लगभग तीन गुना हो गई। अब वह न सिर्फ अपने परिवार का खर्च उठा रही है, बल्कि बचत भी कर रही है।

आनलाइन स्कैम से बचाव की भी दी जाती है जानकारी
प्रक्रिया की शुरुआत जागरूकता शिविरों से होती है, जहां महिलाओं को बैंकिंग, बचत और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है। भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआइआइ) प्रतिनिधि लक्ष्मी विश्वकर्मा बताती हैं कि प्रशिक्षण में बजट बनाना, लेन-देन, यूपीआइ का सुरक्षित उपयोग, आनलाइन स्कैम से बचाव, लाभ-हानि का प्रतिशत समझना और प्रोजेक्ट तैयार करने की जानकारी दी जाती है। इसके साथ ही बैंकर्स से संवाद कर ऋण लेने की प्रक्रिया, उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी, उत्पाद की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग के तरीके भी बताए जाते हैं।

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